धनतेरस पर यम दीपदान: सिर्फ 1 घंटा 16 मिनट के शुभ मुहूर्त में ऐसे तैयार करें विशेष दीया और पढ़ें ये चमत्कारी मंत्र!

आज, 18 अक्टूबर 2025 को धनतेरस (धन त्रयोदशी) का पावन पर्व मनाया जा रहा है। यह दिन न केवल भगवान धन्वंतरि, मां लक्ष्मी, भगवान गणेश और कुबेर जी की पूजा के लिए खास है, बल्कि यह मृत्यु के देवता यमराज के लिए यम दीपदान करने की एक विशेष परंपरा का भी दिन है।
पद्मपुराण और स्कंद पुराण जैसे ग्रंथों में यम दीपदान के महत्व का उल्लेख मिलता है। मान्यता है कि प्रदोष काल में यम का दीपक जलाने से परिवार के सदस्यों पर आने वाले अकाल मृत्यु के भय से रक्षा होती है। यह दीपदान दीर्घायु, आरोग्य, सुख और समृद्धि में वृद्धि लाता है।
आज यम दीपदान के लिए केवल 1 घंटा 16 मिनट का अत्यंत शुभ मुहूर्त है, इसलिए यह जानना ज़रूरी है कि इस विशेष दीये को कैसे तैयार करें और दीपदान के दौरान कौन सा मंत्र पढ़ें।
यम दीपदान का शुभ मुहूर्त (आज – 18 अक्टूबर 2025)
यम दीपदान हमेशा प्रदोष काल में करना शुभ माना जाता है।
| विवरण | समय | अवधि |
| शुभ मुहूर्त | शाम 5:48 बजे से 7:04 बजे तक | 1 घंटा 16 मिनट |
शुभ फलों की प्राप्ति के लिए इस निर्धारित शुभ मुहूर्त में ही यम दीपदान करें।
ऐसे तैयार करें यम का विशेष दीपक
यम दीपदान के लिए साधारण दीपक की जगह चौमुखा (चार मुख वाला) दीया तैयार किया जाता है।
* दीये का चुनाव: चौमुखा मिट्टी का एक बड़ा दीपक लें। यह दीया चार दिशाओं में प्रकाश फैलाने का प्रतीक होता है। कुछ मान्यताओं के अनुसार आटे का चौमुखा दीपक भी बनाया जा सकता है।
* दीये को तैयार करना: दीये को कुछ घंटों के लिए पानी में भिगो दें। इससे दीया तेल को कम सोखेगा और लंबे समय तक जल पाएगा। पानी से निकालने के बाद इसे अच्छी तरह सुखा लें।
* बत्ती (बाती) लगाना: स्वच्छ रुई की दो लंबी बत्तियां बनाएं और उन्हें दीये में एक-दूसरे पर आड़ी (cross) इस प्रकार रखें कि दीये के बाहर चारों दिशाओं में बत्ती के चार मुख दिखाई दें।
* तेल भरना: दीये में सरसों का तेल भरें। यह तेल तमोगुणी ऊर्जा को शांत करने में सहायक माना जाता है।
* अन्य सामग्री: कुछ क्षेत्रों में सरसों के तेल के साथ दीये में काले तिल डालने की भी परंपरा है।
यम दीपदान की विधि
शुभ मुहूर्त में इस दीये को जलाते समय इन बातों का ध्यान रखें:
* दीपक जलाना: तैयार किए गए दीपक को रोली, अक्षत (चावल) और पुष्प से पूजें।
* आसन देना: दीपक को सीधे जमीन पर नहीं रखना चाहिए। घर के मुख्य द्वार के बाहर, थोड़ी सी खील या गेहूं की ढेरी बनाकर उस पर दीये को रखें। (गेंहू या चावल का आसन नकारात्मक ऊर्जा को कम करने में भी सहायक होता है)।
* दिशा: दीपक को दक्षिण दिशा की ओर मुख करके रखें। दक्षिण दिशा यमराज की मानी जाती है।
* मंत्र जाप: दीपक जलाते और रखते समय यम दीपदान मंत्र का जाप करें।
यम दीपदान का विशेष मंत्र
मृत्युनाऽ पाशहस्तेन कालेन भार्या सह।
त्रयोदशीं दीपदानात् सूर्यजः प्रीयतामिति॥
दीपक जलाते समय इस मंत्र का जाप करना अत्यंत शुभ फलदायी होता है:
मंत्र का सरल अर्थ:
“मृत्यु (यमराज), जो अपने हाथ में पाश (फंदा) और दण्ड धारण किए हुए हैं, जो काल (समय) स्वरूप हैं और अपनी पत्नी (श्यामा) के साथ विराजमान हैं, वे सूर्यपुत्र (यमराज) त्रयोदशी तिथि पर किए गए इस दीपदान से मुझ पर प्रसन्न हों।”
आप चाहें तो इसके बाद “ॐ यमदेवाय नमः” मंत्र का जाप करते हुए यमदेव को नमस्कार कर सकते हैं।
यह दीपदान न केवल अकाल मृत्यु का भय दूर करता है, बल्कि घर के सदस्यों की आयु, सेहत, सुख और समृद्धि में भी बढ़ोत्तरी करता है।
डिस्क्लेमर: (इस आलेख में दी गई जानकारियाँ धार्मिक मान्यताओं और सामान्य जानकारियों पर आधारित हैं। विस्तृत और अधिक जानकारी के लिए संबंधि
त विशेषज्ञ की सलाह जरूर लें।)

