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छोटी दिवाली (नरक चतुर्दशी): नरक से मुक्ति और यमराज का आशीर्वाद,सौंदर्य, स्वास्थ्य और स्वच्छता का महाअभियान!

रोशनी के पर्व दीपावली की तैयारी हुई शुरू, छोटी दिवाली बनी रूप और स्वास्थ्य का त्योहार

रोशनी के पर्व दीपावली से ठीक एक दिन पहले मनाया जाने वाला त्योहार ‘नरक चतुर्दशी’ इस वर्ष 19 या 20 अक्टूबर 2025 को पड़ रहा है। इसे ‘छोटी दिवाली’, ‘रूप चौदस’ या ‘काली चौदस’ के नाम से भी जाना जाता है। इस दिन मृत्यु के देवता यमराज की विशेष पूजा और दीपदान किया जाता है, जिससे अकाल मृत्यु का भय दूर होता है और व्यक्ति को नरक से मुक्ति मिलती है।पंचांग के अनुसार, कार्तिक मास के कृष्ण पक्ष की चतुर्दशी तिथि इस वर्ष 19 अक्टूबर 2025 को दोपहर 01:51 बजे शुरू होगी और 20 अक्टूबर 2025 को दोपहर 03:44 बजे समाप्त होगी।
अभ्यंग स्नान का शुभ मुहूर्त (20 अक्टूबर): सुबह 05:13 बजे से 06:25 बजे तक (सूर्योदय से पूर्व)
यम दीपदान (19 अक्टूबर की शाम): प्रदोष काल में दीपदान करना शुभ रहेगा।
पौराणिक महत्व: बुराई पर अच्छाई की जीत
नरक चतुर्दशी से जुड़ी दो प्रमुख पौराणिक कथाएं हैं:
* नरकासुर वध: मान्यता है कि इसी दिन भगवान श्रीकृष्ण ने अत्याचारी राक्षस नरकासुर का वध किया था और उसकी कैद से 16,100 कन्याओं को मुक्त कराया था। यह कथा बुराई पर अच्छाई और अन्याय पर न्याय की जीत का प्रतीक है।
* यमराज की पूजा: इस दिन यमराज की पूजा का विशेष महत्व है। कहा जाता है कि जो व्यक्ति विधि-विधान से यमराज का तर्पण और दीपदान करता है, उसे नरक की यातनाओं से मुक्ति मिलती है।
पूजा विधि और खास अनुष्ठान:
नरक चतुर्दशी पर निम्नलिखित अनुष्ठानों का पालन करना विशेष फलदायी माना जाता है:
* अभ्यंग स्नान (रूप चौदस): सूर्योदय से पूर्व उठकर, शरीर पर तेल लगाकर अपामार्ग (चिचड़ी) की पत्तियां जल में डालकर स्नान करने की परंपरा है। इसे ‘अभ्यंग स्नान’ कहते हैं। यह स्नान सौंदर्य और स्वास्थ्य से भी जुड़ा है, तथा पापों का नाश कर नरक के भय से मुक्ति दिलाता है।
* यम तर्पण और प्रार्थना: स्नान के बाद यमराज को तीन अंजलि जल अर्पित करने का विधान है। इस दौरान दक्षिण दिशा की ओर मुख करके यमराज से अकाल मृत्यु से मुक्ति की प्रार्थना की जाती है।
* यम दीपदान: संध्या के समय घर के मुख्य द्वार पर, आटे या मिट्टी का चौमुखी दीपक बनाकर, तेल भरकर, दक्षिण दिशा की ओर मुख करके जलाया जाता है। यह ‘यम दीपक’ कहलाता है। मान्यता है कि यह दीपक पूरे परिवार को अकाल मृत्यु से बचाता है।
* श्रीकृष्ण एवं काली पूजा: इस दिन भगवान श्रीकृष्ण की पूजा भी की जाती है। कुछ स्थानों पर इसे ‘काली चौदस’ के रूप में मनाते हुए मां काली की पूजा का भी विधान है।
इस दिन इन बातों का रखें ध्यान:
* सूर्योदय के बाद देर तक सोने से बचें।
* घर में गंदगी न रखें; घर की साफ-सफाई और सजावट करें।
* किसी से क्रोध, झगड़ा या कठोर शब्द का प्रयोग न करें।
यह पर्व न केवल अंधकार पर प्रकाश की विजय का संदेश देता है, बल्कि हमें स्वास्थ्य और आत्मशुद्धि की ओर भी प्रेरित करता है। छोटी दिवाली की रात जलाए गए दीपक हमारे जीवन में सुख, शांति और समृद्धि का मार्ग प्रशस्त करते हैं।

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