नारी शक्ति और संस्कृति का संगम: जोगनीपाली में 58वाँ शरद पूर्णिमा महोत्सव भव्यता के साथ संपन्न!

जोगनीपाली – परंपरा, आस्था और संस्कृति के अद्भुत समागम के रूप में जोगनीपाली ग्राम में इस वर्ष 58वीं शरद पूर्णिमा महोत्सव का आयोजन अत्यंत भव्यता, उल्लास और अनुशासन के साथ संपन्न हुआ। इस ऐतिहासिक आयोजन की सफलता का श्रेय मुख्य रूप से ज्वाला महिला समूह जोगनीपाली और ग्राम पंचायत जोगनीपाली के संयुक्त तत्वावधान को जाता है, जिसने महिला शक्ति के उत्कृष्ट संगठन और नेतृत्व क्षमता का प्रदर्शन किया।
महिला नेतृत्व बना मुख्य आधार
कार्यक्रम की संपूर्ण व्यवस्था और संचालन की जिम्मेदारी ज्वाला महिला समूह की अध्यक्षा श्रीमती गंगा बाई और उनकी समर्पित टीम ने संभाली। तारा सिदार, नीरू ददसेना, केवरा चौहान, सावित्री भोई, सुन्द्रो बाई, जनकुमारी सिदार, बनकुवर सिदार, ताजिया सिदार, निवार सिदार सहित समूह की अन्य सदस्याओं ने मंच व्यवस्था से लेकर अतिथि सत्कार, सांस्कृतिक संयोजन, प्रकाश-सज्जा और भोजन वितरण तक सभी कार्यों को समर्पण और अनुशासन के साथ सफलतापूर्वक अंजाम दिया। यह आयोजन इस बात का जीवंत प्रमाण बन गया कि जब महिलाओं को जिम्मेदारी दी जाती है, तो वे न केवल उसे निभाती हैं, बल्कि समाज के लिए प्रेरणा का स्रोत बनती हैं।
गणमान्य अतिथियों की गरिमामयी उपस्थिति
कार्यक्रम में मुख्य अतिथि के रूप में क्षेत्र की लोकप्रिय विधायक श्रीमती चातुरी ने अपनी उपस्थिति से शोभा बढ़ाई। अध्यक्षता श्रीमती अनीता चौधरी (समाज सेविका एवं महिला नेतृत्वकर्ता) ने की। मंच पर ग्राम पंचायत जोगनीपाली की सरपंच श्रीमती शिवकुमारी महेंद्र चौधरी, पूर्व जनपद सदस्य श्रीमती उर्मिला खाखा, सरपंच श्री युगल साहू (इच्छापुर), सरपंच प्रतिनिधि महेंद्र चौधरी, प्रतिनिधि श्री जयप्रकाश साहू, तथा श्री महोहर खाखा सहित अनेक गणमान्य अतिथि उपस्थित रहे। मंच संचालन कैलाश चौहान ने किया।

शाम ढलते ही शरद पूर्णिमा की चाँदनी में कार्यक्रम का विधिवत शुभारंभ हुआ। सांस्कृतिक कार्यक्रमों की झड़ी ने उपस्थित जनसमूह को देर रात तक मंत्रमुग्ध रखा। सतगुरु भागवत पार्टी पंधी द्वारा धार्मिक कथा और सतगुरु भागवत पार्टी केन्दुधार की भक्तिमय झाँकियों ने वातावरण को आध्यात्मिक बनाया। इसके पश्चात, गम्मत पार्टी बरिहापाली की हास्य-व्यंग्य प्रस्तुतियों ने दर्शकों को हँसने और सोचने पर मजबूर किया।
कार्यक्रम का मुख्य आकर्षण सावित्री कहार लोककला मंच, रायपौर की पारंपरिक नृत्य और लोकगीत प्रस्तुतियाँ रहीं, जिन्होंने छत्तीसगढ़ की लोक परंपराओं की जीवंत झलक पेश की। अनुमानित 10,000 से अधिक लोगों की भीड़ ने पूरी रात इन मनमोहक प्रस्तुतियों का आनंद लिया और ग्रामीण जीवन की आत्मा से जुड़े इस महोत्सव की गरिमा को बढ़ाया।
डेढ़ शताब्दी पुरानी परंपरा का निर्वाह
जानकारी के अनुसार, चाँदली डोंगर में आयोजित होने वाला यह शरद पूर्णिमा मेला अत्यंत प्राचीन है। यह परंपरा लगभग डेढ़ शताब्दी पूर्व महेश मुनि द्वारा प्रारंभ की गई थी। उनके प्रयासों से शुरू हुई यह पूजा धीरे-धीरे ग्राम की आस्था का केंद्र बन गई। समय के साथ यह आयोजन और भव्य होता गया, और पिछले 10 वर्षों से ज्वाला महिला समूह ने इसे अत्यंत गरिमा और समर्पण के साथ संभाल रखा है।
ग्रामवासियों का मत है कि यह मेला न केवल धार्मिक महत्व रखता है, बल्कि यह लोगों को एकजुट करने, सामाजिक समरसता बढ़ाने और अगली पीढ़ी को परंपरा से जोड़ने का सशक्त माध्यम भी है। जोगनीपाली की यह परंपरा छत्तीसगढ़ की असली संस्कृति और मातृशक्ति की पहचान है। संपूर्ण ग्रामवासियों, अतिथियों और ज्वाला महिला समूह की मेहनत से यह 58वीं शरद पूर्णिमा महोत्सव एक ऐतिहासिक और स्मरणीय आयोजन बन गया।


