सरायपाली – राजराजेश्वरी दुर्गा पंडाल में भव्य शस्त्र पूजन, नारी शक्ति का हुआ शौर्य प्रदर्शन

सरायपाली, छत्तीसगढ़। शारदीय नवरात्र महोत्सव के पावन अवसर पर सरायपाली नगर के राजराजेश्वरी दुर्गा पंडाल में एक अत्यंत भव्य और गरिमामय शस्त्र पूजन कार्यक्रम का आयोजन किया गया। यह आयोजन दुर्गा वाहिनी एवं मातृशक्ति, विश्व हिंदू परिषद नगर सरायपाली के संयुक्त तत्वावधान में संपन्न हुआ, जिसने समाज को संगठन, शक्ति और संस्कृति की रक्षा का सशक्त संदेश दिया।

विधि-विधान से संपन्न हुआ पूजन
कार्यक्रम का संचालन और पूजन कार्य अत्यंत विधि-विधान से किया गया। पंडित सुभाष त्रिपाठी महाराज जी ने सहयोगी महेश पाणिग्रही और अन्य पुरोहित गणों के साथ मंत्रोच्चार के बीच संपूर्ण अनुष्ठान को संपन्न कराया। वैदिक मंत्रों की ध्वनि से संपूर्ण वातावरण भक्तिमय और गुंजायमान हो उठा।
पंडित सुभाष त्रिपाठी महाराज जी ने पूजन के महत्व पर प्रकाश डालते हुए कहा कि माँ दुर्गा के शस्त्र केवल शक्ति और पराक्रम के प्रतीक नहीं हैं, बल्कि वे धर्म, न्याय और सत्य की रक्षा के द्योतक भी हैं। उन्होंने जोर देकर कहा कि जब व्यक्ति धर्म और समाज की रक्षा के लिए शस्त्र उठाता है, तभी शस्त्र पूजा का वास्तविक अर्थ सिद्ध होता है।
मातृशक्ति और दुर्गा वाहिनी की गरिमामयी उपस्थिति
इस कार्यक्रम की सबसे महत्वपूर्ण विशेषता मातृशक्ति का नेतृत्व और उनकी भारी भागीदारी रही। जिला संयोजिका अनीता चौधरी, प्रखंड संयोजिका नमिता साहू, मुस्कान गुप्ता, संजना गोस्वामी, खुशी गुप्ता, आमिशी गुप्ता और नगर संयोजक गुड्डू जेसवाल, प्राची यादव सहित अनेक दुर्गा वाहिनी की बहनों की उपस्थिति ने आयोजन को भव्यता प्रदान की।
मातृशक्ति के नेतृत्व में की गई शस्त्र पूजा ने यह संदेश दिया कि नारी केवल कोमलता का प्रतीक नहीं है, बल्कि शक्ति और साहस की मूर्ति भी है। दुर्गा वाहिनी की कार्यकर्ताओं ने संयुक्त रूप से कहा कि समाज के उत्थान और राष्ट्र निर्माण में नारी शक्ति की भूमिका सबसे महत्वपूर्ण है। उन्होंने समाज में व्याप्त बुराइयों, अंधविश्वासों और अन्याय के विरुद्ध सदैव डटकर खड़े रहने का संकल्प लिया।
संस्कृति और राष्ट्ररक्षा का संकल्प
पूजन के अवसर पर उपस्थित वक्ताओं ने शस्त्र पूजा को केवल एक धार्मिक परंपरा नहीं, बल्कि हमारी संस्कृति और इतिहास का अभिन्न अंग बताया। उन्होंने कहा कि यह हमें याद दिलाती है कि जब समाज पर संकट आता है, तब धर्म और सत्य की रक्षा हेतु शस्त्रों का प्रयोग भी आवश्यक होता है। सभी उपस्थित जनों ने अपने समाज, संस्कृति और राष्ट्र की रक्षा हेतु सदैव तत्पर रहने का संकल्प लिया।
दुर्गा समिति के सदस्य रूबी ठाकुर, शैलेन्द्र ठाकुर, हेमंत अग्रवाल, फकीर यादव अग्रवाल, आकाश अग्रवाल, सौरभ सतपथी, घनश्याम पटेल सहित अनेक सदस्यों ने कार्यक्रम को सफल बनाने में अपना महत्वपूर्ण योगदान दिया।
चैतन्य झाँकियाँ और भक्तिमय वातावरण
राजराजेश्वरी दुर्गा पंडाल पूरे नगर में आकर्षण का केंद्र बना हुआ है। पंडाल की भव्य सजावट और माँ दुर्गा की आकर्षक प्रतिमा भक्तों को बरबस ही खींच लाती है। यहाँ की एक प्रमुख विशेषता है कि प्रतिदिन बहनों द्वारा चैतन्य झाँकियाँ प्रस्तुत की जाती हैं, जिनमें दुर्गा माता के विविध रूप, वीरभूषा और शौर्य स्वरूप का दर्शन कराया जाता है।
इसके अतिरिक्त, शास्वत ठाकुर प्रतिदिन देवताओं के स्वरूप को जीवंत झाँकी के माध्यम से प्रस्तुत कर रहे हैं, जो विशेष आकर्षण का केंद्र है। छप्पन भोग के साथ कथा वाचिक प्रियंका त्रिपाठी एवं खगेस डड़ सेना के सुन्दर भजनों से वातावरण अत्यंत भक्तिमय हो जाता है। नगरवासियों की भीड़ उमड़ पड़ती है और पूरा माहौल भक्ति और उत्साह से सराबोर हो जाता है।
कार्यक्रम के अंत में सभी उपस्थित जनों को प्रसाद वितरित किया गया। युवाओं और महिलाओं की बड़ी संख्या में उपस्थिति ने सरायपाली क्षेत्र में धार्मिक आस्था और सामाजिक एकजुटता के प्रबल भाव को सिद्ध कर दिया।
नगर संयोजिका बहनों ने अंत में कहा कि ऐसे धार्मिक आयोजन न केवल हमारी परंपरा और संस्कृति को जीवित रखते हैं, बल्कि समाज में संगठन, एकता और सहयोग की भावना को भी मजबूत करते हैं। सरायपाली जैसे कस्बाई क्षेत्र में इस तरह के भव्य आयोजन यह संदेश देते हैं कि भारतीय संस्कृति आज भी जीवंत है और नई पीढ़ी तक सफलतापूर्वक पहुँच रही है।


