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विश्व पर्यावरण दिवस पर जंगल धधकता रहा, बांसला की पहाड़ी से सामने आई तस्वीरों ने खड़े किए कई सवाल

The forest kept blazing on World Environment Day; images emerging from Bansla Hill have raised several questions.

 भानुप्रतापपुर :  विश्व पर्यावरण दिवस के अवसर पर जहां एक ओर पर्यावरण संरक्षण के संदेश दिए जा रहे थे और विभिन्न स्थानों पर पौधरोपण कार्यक्रम आयोजित किए जा रहे थे, वहीं दूसरी ओर बांसला की पहाड़ी से सामने आई तस्वीरों ने इन प्रयासों की जमीनी हकीकत पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए। पहाड़ी क्षेत्र में जंगल के भीतर आग लगी रही और बड़ी संख्या में पेड़ उसकी चपेट में आते रहे।

पर्यावरण बचाने की बात और जंगलों में आग, विरोधाभास ने खींचा ध्यान

विश्व पर्यावरण दिवस पर सामने आया यह घटनाक्रम वन संरक्षण व्यवस्था की प्रभावशीलता पर सवाल उठाता है। जंगल में धधकती आग यह संकेत भी देती है कि अब भी कुछ लोग लापरवाही या अन्य कारणों से प्रकृति को नुकसान पहुंचाने से बाज नहीं आ रहे हैं। ऐसी घटनाएं पर्यावरण संरक्षण के दावों और वास्तविक स्थिति के बीच का अंतर उजागर करती हैं।

पेड़-पौधों के साथ वन्यजीवों पर भी मंडराया खतरा

जंगल में लगी आग का असर केवल पेड़ों तक सीमित नहीं रहता। इससे वन क्षेत्र की जैव विविधता प्रभावित होती है और वन्यजीवों का प्राकृतिक आवास भी खतरे में पड़ जाता है। आग की चपेट में आने से छोटे जीव-जंतु और पक्षियों के जीवन पर भी गंभीर संकट उत्पन्न हो सकता है।

जिस दिन प्रकृति की रक्षा का संकल्प, उसी दिन जंगल मांगता रहा मदद

विडंबना यह रही कि जिस दिन पूरे देश में पर्यावरण संरक्षण को लेकर जागरूकता अभियान चलाए जा रहे थे, उसी दिन बांसला की पहाड़ी का जंगल आग की लपटों से जूझता नजर आया। एक ओर पौधों को बचाने और हरियाली बढ़ाने की बातें हो रही थीं, तो दूसरी ओर वन क्षेत्र मदद और संरक्षण की प्रतीक्षा करता दिखाई दिया।

सिर्फ पौधरोपण नहीं, जंगलों की सुरक्षा भी बने प्राथमिकता

पर्यावरण संरक्षण केवल पौधे लगाने तक सीमित नहीं है, बल्कि मौजूदा जंगलों और प्राकृतिक संसाधनों की सुरक्षा भी उतनी ही जरूरी है। बांसला की पहाड़ी से सामने आई यह घटना याद दिलाती है कि पर्यावरण बचाने के प्रयास तब ही सार्थक होंगे, जब जंगलों को आग और अन्य खतरों से बचाने के लिए प्रभावी और सतत कदम उठाए जाएं।

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