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मानसून ने छत्तीसगढ़ से समेटना शुरू किया डेरा, बारिश थमी तो बढ़ी गर्मी-उमस, जानें आगे कैसा रहेगा मौसम


इस साल मानसून का सफर उतार-चढ़ाव भरा रहा। शुरुआत में बारिश अपेक्षाकृत कमजोर रही, लेकिन बाद के महीनों में स्थिति बदल गई। जुलाई और सितंबर में हुई अच्छी बारिश ने पूरे सीजन के आंकड़े को सामान्य से ऊपर पहुंचा दिया। सरकारी आंकड़ों के अनुसार 3 अक्टूबर तक प्रदेश में औसत बारिश 1155.3 मिलीमीटर दर्ज हुई है, जबकि पिछले 10 साल का सामान्य औसत 1131.1 मिलीमीटर है। यानी बारिश सामान्य के मुकाबले 102.1 प्रतिशत रही।
पूरे प्रदेश में बारिश एक जैसी नहीं रही। कुछ जिलों में सामान्य से काफी ज्यादा पानी बरसा, जबकि कई इलाकों में बारिश का आंकड़ा सामान्य से नीचे रहा। सारंगढ़-बिलाईगढ़, रायपुर, नारायणपुर, मुंगेली, गरियाबंद, धमतरी, बालोद, बलौदाबाजार और बलरामपुर में सामान्य से अधिक बारिश दर्ज की गई।
दूसरी तरफ सरगुजा में सामान्य से 41 प्रतिशत कम बारिश हुई। जशपुर और बेमेतरा में भी बारिश सामान्य से करीब 36 प्रतिशत कम रही। इससे साफ है कि पूरे प्रदेश का औसत सामान्य से ऊपर होने के बावजूद जिलेवार तस्वीर काफी अलग रही
मानसून के शुरुआती दौर में बारिश कमजोर रहने के बाद जुलाई में परिस्थितियां बदलीं। इस महीने प्रदेश में करीब 494 मिलीमीटर बारिश रिकॉर्ड की गई, जबकि सामान्य आंकड़ा 375.5 मिलीमीटर है।
अगस्त में बारिश 355.3 मिलीमीटर रही, जो सामान्य 364.2 मिलीमीटर के करीब थी। सितंबर में फिर बारिश ने जोर पकड़ा और करीब 279.3 मिलीमीटर पानी बरसा, जबकि इस महीने का सामान्य आंकड़ा 208.9 मिलीमीटर है।
यानी पूरे सीजन में खासकर जुलाई और सितंबर की बारिश ने प्रदेश के कुल वर्षा आंकड़े को मजबूत किया।
मानसून की विदाई से ठीक पहले सितंबर के आखिरी सप्ताह में बंगाल की खाड़ी से बने सिस्टम ने प्रदेश में बारिश बढ़ा दी थी। कई जिलों में लगातार बारिश के चलते निचले इलाकों में पानी भर गया था। कुछ जगहों पर बाढ़ जैसे हालात भी बने।
इस दौरान कच्चे मकानों को नुकसान पहुंचा और खेतों में खड़ी फसल भी प्रभावित हुई। राहत और बचाव कार्यों के लिए एनडीआरएफ तथा एसडीआरएफ की टीमों की मदद लेनी पड़ी। राजधानी रायपुर में भी कई इलाकों में जलभराव की समस्या सामने आई थी।
मानसून के पीछे हटने के साथ मौसम का अगला चरण गर्म और उमसभरा हो सकता है। बारिश की गतिविधियां कमजोर होने के कारण दिन में धूप का असर बढ़ेगा। हालांकि, इसका मतलब यह नहीं है कि प्रदेश के हर हिस्से में बारिश पूरी तरह बंद हो जाएगी। स्थानीय स्तर पर कहीं-कहीं हल्की बारिश की संभावना बनी रह सकती है।
3 अक्टूबर के मौसम पूर्वानुमान में प्रदेश के लिए कोई बड़ा बारिश अलर्ट नहीं था और अगले कुछ दिनों में भी व्यापक बारिश की संभावना कम बताई गई है।
बारिश का असर कम होते ही प्रदेश में तापमान बढ़ने लगा है। पिछले 24 घंटे में कोरबा 34.6 डिग्री सेल्सियस के साथ सबसे गर्म रहा। राजनांदगांव में 34.5, जांजगीर-चांपा में 34.4, रायपुर में 34.2 और रायगढ़ में 34.1 डिग्री तापमान रिकॉर्ड किया गया।
इसके उलट रात में कुछ इलाकों में ठंडक का असर भी महसूस होने लगा है। पेण्ड्रा रोड में न्यूनतम तापमान 18.6 डिग्री सेल्सियस दर्ज किया गया।
राजधानी रायपुर में मौसम मुख्य रूप से साफ रहने का अनुमान है। दिन का तापमान करीब 34 डिग्री और रात का तापमान 25 डिग्री के आसपास रह सकता है। बारिश की संभावना कम रहने से दिन के समय उमस और गर्मी ज्यादा महसूस हो सकती है।
यानी छत्तीसगढ़ अब धीरे-धीरे मानसून से बाहर निकल रहा है। अगले कुछ दिनों में जैसे-जैसे मानसून की वापसी आगे बढ़ेगी, वैसे-वैसे बारिश की गतिविधियां कम और मौसम का मिजाज ज्यादा शुष्क होता जाएगा।