अब पेयजल जांच रिपोर्ट पोर्टल पर अपलोड करना अनिवार्य, लापरवाही पर होगी कार्रवाई

रायपुर : प्रदेश के सभी नगरीय निकायों को अब पेयजल गुणवत्ता परीक्षण की रिपोर्ट विभागीय पोर्टल पर अनिवार्य रूप से अपलोड करनी होगी। विभाग ने 15 दिनों में पेयजल परीक्षण की रिपोर्ट गूगल शीट के माध्यम से भेजने की व्यवस्था को समाप्त कर दिया है। निकायों द्वारा पोर्टल पर दर्ज की गई जानकारी की नियमित जांच और निगरानी के लिए नोडल अधिकारी नियुक्त किए जाएंगे। नोडल अधिकारियों की नियुक्ति के संबंध में विभाग ने सभी क्षेत्रीय संयुक्त संचालकों को निर्देश जारी किए हैं।
यदि कोई निकाय समय पर जल परीक्षण रिपोर्ट अपलोड नहीं करता है, तो उसके विरुद्ध कार्रवाई की जाएगी। नगरीय प्रशासन एवं विकास विभाग ने इस संबंध में आदेश जारी किया है। सभी नगर निगम आयुक्तों, संयुक्त संचालकों और नगर पालिका परिषद एवं नगर पंचायतों के मुख्य नगर पालिका अधिकारियों को इसका पालन सुनिश्चित करने के निर्देश दिए गए हैं।
सभी नगरीय निकायों को विभागीय पोर्टल पर लागिन कर वाटर टेस्टिंग मेन्यू में नियमित रूप से जल परीक्षण की जानकारी दर्ज करनी होगी। अधिकारियों का कहना है कि सुरक्षित पेयजल उपलब्ध कराना नगरीय निकायों की प्राथमिक जिम्मेदारी है। सीपीएचईईओ मैन्युअल के अनुसार, नियमित जल गुणवत्ता परीक्षण से जलजनित रोगों की रोकथाम में मदद मिलती है। इसी उद्देश्य से सभी निकायों को निर्धारित अवधि में जल के नमूने लेकर परीक्षण कराना और उसकी रिपोर्ट पोर्टल पर अपलोड करना अनिवार्य किया गया है।
बारिश में बढ़ जाता है जलजनित बीमारियों का खतरा
बारिश के मौसम में दूषित पानी और जलभराव के कारण टाइफाइड, हैजा (कोलरा), डायरिया, पीलिया (जान्डिस) जैसी जलजनित बीमारियों का खतरा बढ़ जाता है। इस मौसम में बैक्टीरिया और वायरस तेजी से फैलते हैं, जिससे पेट और लिवर से जुड़ी समस्याएं होती हैं। चिकित्सकों का कहना है कि बारिश के दौरान पेयजल लाइनों में रिसाव होने पर दूषित पानी के मिलने की आशंका रहती है। ये पानी पीने से बैक्टीरिया और वायरस शरीर में पहुंचकर आंतों को संक्रमित कर देते हैं, जिससे दस्त, उल्टी, पेट दर्द, फूड प्वाइजनिंग और टाइफाइड जैसी बीमारियों का खतरा बढ़ जाता है। छोटे बच्चों, बुजुर्गों और पहले से बीमार लोगों में संक्रमण का खतरा अधिक रहता है। वर्तमान में प्रदेश के सबसे बड़े आंबेडकर अस्पताल, जिला अस्पताल और निजी अस्पतालों में मरीजों की संख्या बढ़ने लगी है। आंबेडकर अस्पताल में प्रतिदिन जलजनित बीमारियों से पीड़ित करीब 80 मरीज पहुंच रहे हैं, जिनमें पीलिया के भी मरीज शामिल हैं। कुछ लोगों को भर्ती करने की भी जरूरत पड़ रही है।
बरसात के मौसम में जलजनित बीमारियों का खतरा बढ़ जाता है। लोग केवल उबालकर या शुद्ध किया हुआ पानी ही पिएं। घर और आसपास स्वच्छता रखें। खुले में बिकने वाले खाद्य पदार्थों से बचें। यदि दस्त, उल्टी, पेट दर्द या बुखार के लक्षण दिखाई दें, तो स्वयं दवा लेने के बजाय तुरंत चिकित्सकों से परामर्श लें।
डा. योगेंद्र मल्होत्रा, मेडिसिन विभाग, आंबेडकर अस्पताल, रायपुर



