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8 करोड़ के धान का बड़ा खेल! 24 हजार क्विंटल फसल खराब, रिकॉर्ड से 12 हजार क्विंटल धान गायब होने पर उठे गंभीर सवाल

Massive paddy scam worth ₹8 crore! 24,000 quintals of produce spoiled; serious questions raised over the disappearance of 12,000 quintals of paddy from records.

 छत्तीसगढ़: सुकमा जिले में धान खरीदी और संग्रहण व्यवस्था को लेकर बड़ा मामला सामने आया है। वर्ष 2024-25 में खरीदे गए हजारों क्विंटल धान के खराब होने से शासन को करोड़ों रुपये का नुकसान होने का अनुमान है। सबसे चौंकाने वाली बात यह है कि भौतिक सत्यापन और ऑनलाइन रिकॉर्ड के आंकड़ों में भारी अंतर सामने आया है, जिससे पूरे मामले पर सवाल खड़े हो गए हैं।

करीब 8 करोड़ रुपये के धान को नहीं बचा सका प्रशासन

प्रारंभिक जानकारी के अनुसार, सुकमा धान संग्रहण केंद्र में वर्ष 2024-25 का लगभग 24,118.56 क्विंटल धान लंबे समय तक पड़ा रहने के कारण पूरी तरह खराब हो गया। इस धान की अनुमानित कीमत करीब 8 करोड़ रुपये बताई जा रही है। किसानों से समर्थन मूल्य पर खरीदे गए इस धान को समय पर मिलिंग या परिवहन के लिए नहीं भेजा गया, जिसके कारण उसकी गुणवत्ता पूरी तरह प्रभावित हो गई।

संग्रहण केंद्र की ओर से 20 मार्च 2026 को जिला विपणन अधिकारी को पत्र लिखकर 36,376 बोरियों में रखे धान के खराब होने की जानकारी भी दी गई थी।

15 महीने तक नहीं हुआ उठाव, बारिश और नमी ने बिगाड़ी हालत

बताया जा रहा है कि खरीदी के बाद करीब 15 महीने तक धान का उठाव नहीं किया गया। इस दौरान बड़ी मात्रा में धान खुले या पर्याप्त सुरक्षा के बिना पड़ा रहा। लगातार नमी, बारिश और रखरखाव में लापरवाही के कारण धान पूरी तरह खराब हो गया। यदि समय रहते परिवहन और भंडारण की व्यवस्था की जाती तो करोड़ों रुपये के नुकसान से बचा जा सकता था।

रिकॉर्ड में 24 हजार क्विंटल, मौके पर मिले सिर्फ 13 हजार क्विंटल

पूरे मामले का सबसे गंभीर पहलू भौतिक सत्यापन के दौरान सामने आया। जिला विपणन अधिकारी चेतन आनंद थवाईत द्वारा किए गए निरीक्षण में संग्रहण केंद्र पर लगभग 13 हजार क्विंटल धान ही मौजूद पाया गया, जबकि ऑनलाइन रिकॉर्ड में करीब 24 हजार क्विंटल धान दर्ज है।

दोनों आंकड़ों के बीच लगभग 12 हजार क्विंटल धान का अंतर कई सवाल खड़े कर रहा है। आखिर रिकॉर्ड में दर्ज बाकी धान कहां गया? यदि उसका उठाव किया गया तो उसका रिकॉर्ड कहां है और यदि नहीं किया गया तो उसकी जिम्मेदारी किसकी है? इन सवालों का अब तक कोई स्पष्ट जवाब सामने नहीं आया है।

करोड़ों के नुकसान के बावजूद कार्रवाई नहीं, जवाबदेही पर उठे सवाल

इतनी बड़ी आर्थिक क्षति और रिकॉर्ड में भारी अंतर सामने आने के बावजूद अब तक किसी अधिकारी या कर्मचारी के खिलाफ किसी ठोस कार्रवाई की जानकारी सामने नहीं आई है। इसे लेकर किसानों और आम लोगों में नाराजगी है। लोगों का कहना है कि सरकारी धन और किसानों की मेहनत से खरीदे गए धान की इस तरह बर्बादी की जिम्मेदारी तय होनी चाहिए।

केंद्र प्रभारी बोले, कई बार भेजे गए पत्र लेकिन नहीं हुई सुनवाई

सुकमा संग्रहण केंद्र के प्रभारी दीपेंद्र सिंह ठाकुर ने स्वीकार किया कि खराब हो रहे धान की जानकारी कई बार वरिष्ठ अधिकारियों को लिखित रूप में भेजी गई थी। उन्होंने बताया कि लगातार पत्राचार के बावजूद समय पर कोई प्रभावी कदम नहीं उठाया गया, जिसके चलते आखिरकार हजारों क्विंटल धान खराब हो गया।

जांच और जवाबदेही पर टिकी सबकी नजर

अब यह मामला केवल धान खराब होने तक सीमित नहीं रह गया है, बल्कि रिकॉर्ड में सामने आए अंतर और संभावित प्रशासनिक लापरवाही को लेकर भी गंभीर सवाल उठ रहे हैं। ऐसे में सभी की नजर इस बात पर टिकी है कि सरकार इस पूरे मामले की निष्पक्ष जांच कर जिम्मेदार अधिकारियों के खिलाफ क्या कार्रवाई करती है।

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