छत्तीसगढ़ कैबिनेट के बड़े फैसले : 125 दिन रोजगार की गारंटी, गांवों में खुलेंगे आजीविका केंद्र, बायोगैस नीति को भी मिली मंजूरी
Major decisions by the Chhattisgarh Cabinet: Guarantee of 125 days of employment, livelihood centers to open in villages, and approval granted for the biogas policy.

रायपुर : मंगलवार को मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय की अध्यक्षता में हुई छत्तीसगढ़ मंत्रिपरिषद की बैठक में ग्रामीण विकास, रोजगार सृजन और हरित ऊर्जा को बढ़ावा देने वाले कई महत्वपूर्ण प्रस्तावों पर मुहर लगी। बैठक के बाद उपमुख्यमंत्री अरुण साव ने कैबिनेट के फैसलों की जानकारी देते हुए बताया कि राज्य सरकार ने ग्रामीण परिवारों के लिए 125 दिन रोजगार सुनिश्चित करने वाली नई योजना, ग्रामीण आजीविका को मजबूत करने वाली ‘अटल आजीविका समृद्धि हाट’ योजना और कम्प्रेस्ड बायोगैस नीति को मंजूरी दे दी है।
अब ग्रामीण परिवारों को मिलेगी 125 दिन रोजगार की कानूनी गारंटी
कैबिनेट ने ‘विकसित भारत – रोजगार और आजीविका के लिये गारंटी मिशन (ग्रामीण) : वीबी-जी राम जी योजना छत्तीसगढ़’ के प्रारूप को स्वीकृति प्रदान की। भारत सरकार के अधिनियम 2025 के अनुरूप लागू होने वाली इस योजना के तहत पात्र ग्रामीण परिवारों के वयस्क सदस्यों को प्रत्येक वित्तीय वर्ष में 125 दिनों तक अकुशल श्रम आधारित रोजगार की वैधानिक गारंटी मिलेगी।
इस योजना के माध्यम से जल संरक्षण, प्राकृतिक संसाधनों का संरक्षण, ग्रामीण आधारभूत ढांचे का विकास, आजीविका से जुड़ी परिसंपत्तियों का निर्माण और स्थायी रोजगार के अवसर तैयार किए जाएंगे। साथ ही ग्राम पंचायतों के माध्यम से विभिन्न विभागों की योजनाओं का समन्वय और पीएम गति शक्ति अभियान के साथ बेहतर तालमेल भी सुनिश्चित किया जाएगा।
डिजिटल निगरानी से बढ़ेगी पारदर्शिता, राज्य ने रखे 4000 करोड़ रुपये
सरकार ने योजना के प्रभावी संचालन के लिए आधुनिक डिजिटल तकनीक और निगरानी प्रणाली अपनाने का निर्णय लिया है, जिससे कार्यों में पारदर्शिता, जवाबदेही और सुशासन को मजबूती मिलेगी।
इस योजना में केंद्र और राज्य सरकार के बीच खर्च का अनुपात 60:40 रहेगा। वित्तीय वर्ष 2026-27 के बजट में राज्य सरकार ने इसके लिए 4000 करोड़ रुपये का प्रावधान किया है।
‘अटल आजीविका समृद्धि हाट’ से गांवों में बढ़ेंगे रोजगार और कारोबार
मंत्रिपरिषद ने ग्रामीण अर्थव्यवस्था को मजबूत बनाने के उद्देश्य से ‘अटल आजीविका समृद्धि हाट’ योजना को भी मंजूरी दी है। इसके तहत गांवों में सृजन केंद्र, प्रसंस्करण इकाइयां, सेवा केंद्र, विपणन केंद्र और आपूर्ति केंद्र विकसित किए जाएंगे।
योजना के अंतर्गत हथकरघा, बुनाई, सिलाई, हस्तशिल्प, खाद्य प्रसंस्करण, डेयरी, राइस मिल, दलहन एवं तिलहन प्रसंस्करण जैसी गतिविधियों को बढ़ावा मिलेगा। इसके अलावा कोल्ड स्टोरेज, सोलर ड्रायर, कृषि उपकरण मरम्मत केंद्र और अटल डिजिटल केंद्र जैसी सुविधाएं भी विकसित की जाएंगी।
स्थानीय उत्पादों को मिलेगा बड़ा बाजार, ग्रामीणों के लिए खुलेंगे नए अवसर
सरकार का मानना है कि इस योजना से गांवों में ही रोजगार और स्वरोजगार के नए अवसर तैयार होंगे। स्थानीय उत्पादों को बेहतर बाजार उपलब्ध होगा और कृषि, खाद्य प्रसंस्करण, डिजिटल सेवाएं, हरित ऊर्जा तथा ग्रामीण व्यापार को नई गति मिलेगी।
योजना के संचालन की जिम्मेदारी छत्तीसगढ़ राज्य ग्रामीण आजीविका मिशन को सौंपी गई है, जबकि पंचायत एवं ग्रामीण विकास विभाग इसका नोडल विभाग होगा।
छत्तीसगढ़ की नई बायोगैस नीति से कचरे से बनेगी स्वच्छ ऊर्जा
कैबिनेट ने ‘छत्तीसगढ़ कम्प्रेस्ड बायोगैस (CG-CBG) नीति 2026’ के प्रारूप को भी मंजूरी दे दी है। इस नीति के तहत कृषि अवशेष, नगरीय ठोस कचरा, पशुधन अपशिष्ट और अन्य जैविक संसाधनों का वैज्ञानिक तरीके से उपयोग कर कम्प्रेस्ड बायोगैस का उत्पादन किया जाएगा।
सरकार का लक्ष्य अपशिष्ट प्रबंधन को बेहतर बनाना, पर्यावरण संरक्षण को बढ़ावा देना, ग्रीनहाउस गैसों के उत्सर्जन में कमी लाना और जैव उर्वरक उत्पादन को प्रोत्साहित करना है।
हर साल 5 लाख टन बायोगैस उत्पादन की संभावना
‘अंजोर विजन 2047’ के अनुसार छत्तीसगढ़ में प्रतिवर्ष लगभग 5 लाख टन कम्प्रेस्ड बायोगैस उत्पादन की क्षमता मौजूद है। इस नीति के क्रियान्वयन के लिए छत्तीसगढ़ बायोफ्यूल विकास प्राधिकरण को राज्य स्तरीय नोडल एजेंसी बनाया गया है, जबकि ऊर्जा विभाग को आवश्यक दिशा-निर्देश और प्रशासनिक आदेश जारी करने का अधिकार दिया गया है।
ग्रामीण विकास और हरित ऊर्जा पर सरकार का विशेष फोकस
कैबिनेट के इन फैसलों से स्पष्ट है कि राज्य सरकार रोजगार, ग्रामीण अर्थव्यवस्था, स्थानीय उद्योग, डिजिटल सुशासन और स्वच्छ ऊर्जा जैसे क्षेत्रों को प्राथमिकता देते हुए दीर्घकालिक विकास की दिशा में आगे बढ़ रही है। नई योजनाओं के लागू होने के बाद गांवों में रोजगार के अवसर बढ़ने, स्थानीय कारोबार को मजबूती मिलने और पर्यावरण संरक्षण को नई गति मिलने की उम्मीद जताई जा रही है।


