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एक ट्रांसफर बना सियासी संकट, हाईकोर्ट की दखल के बाद भाजपा के 6 पार्षदों के इस्तीफे से बढ़ी हलचल

A transfer sparks a political crisis; stir intensifies following the resignation of six BJP councilors after High Court intervention.

 कोंडागांव :  केशकाल नगर पंचायत में एक अधिकारी के स्थानांतरण को लेकर शुरू हुआ विवाद अब प्रशासनिक दायरे से निकलकर राजनीतिक गलियारों तक पहुंच गया है। स्थानांतरण आदेश को हाईकोर्ट में चुनौती मिलने, अदालत से अंतरिम राहत मिलने और उसके बाद भाजपा के छह पार्षदों के प्राथमिक सदस्यता से इस्तीफा देने की घटना ने पूरे मामले को चर्चा का केंद्र बना दिया है। इस घटनाक्रम ने सरकार और सत्ताधारी दल दोनों के सामने असहज स्थिति पैदा कर दी है।

सरकार के स्थानांतरण आदेश के बाद शुरू हुआ विवाद

छत्तीसगढ़ शासन के नगरीय प्रशासन एवं विकास विभाग ने 14 जून को प्रदेश के 18 मुख्य नगरपालिका अधिकारियों के तबादले का आदेश जारी किया था। इसी सूची में केशकाल नगर पंचायत के प्रभारी मुख्य नगरपालिका अधिकारी नामेश्वर कावडे को उनके मूल पद पर नगरपालिका बड़े बचेली भेजा गया, जबकि नगरपालिका कोंडागांव के मुख्य नगरपालिका अधिकारी देवेश चंदेल को केशकाल की जिम्मेदारी सौंपी गई।

आदेश जारी होने के बाद स्थानीय स्तर पर असंतोष सामने आने लगा और इसे लेकर राजनीतिक तथा प्रशासनिक स्तर पर हलचल तेज हो गई।

हाईकोर्ट पहुंचा मामला, अंतरिम राहत से बढ़ा असमंजस

स्थानांतरण आदेश के खिलाफ नामेश्वर कावडे ने बिलासपुर हाईकोर्ट में याचिका दायर कर सरकार के फैसले को चुनौती दी। मामले की सुनवाई के बाद 18 जून को अदालत ने यथास्थिति बनाए रखने का अंतरिम आदेश जारी कर दिया।

हालांकि इससे पहले ही 15 जून को देवेश चंदेल ने केशकाल पहुंचकर अपना कार्यभार संभाल लिया था और प्रशासनिक प्रक्रिया पूरी कर ली गई थी। ऐसे में अदालत के आदेश के बाद नगर पंचायत में यह स्थिति बन गई कि आखिर वैध मुख्य नगरपालिका अधिकारी किसे माना जाए।

नगर पंचायत में प्रशासनिक भ्रम, कर्मचारी और जनता असमंजस में

हाईकोर्ट के अंतरिम आदेश के बाद नगर पंचायत के कर्मचारियों और जनप्रतिनिधियों के सामने कार्य संचालन को लेकर असमंजस की स्थिति पैदा हो गई है। किस अधिकारी के निर्देशों का पालन किया जाए और नागरिक अपनी समस्याएं किसके समक्ष रखें, इसे लेकर स्पष्टता नहीं बन पाई है।

मंत्री तक पहुंचा मामला, राजनीतिक स्तर पर भी बढ़ी सक्रियता

हाईकोर्ट में कानूनी लड़ाई के साथ-साथ राजनीतिक स्तर पर भी प्रयास तेज हो गए। नगर पंचायत के कुछ भाजपा पार्षद और पदाधिकारी नगरीय प्रशासन मंत्री से मुलाकात कर स्थानांतरण आदेश निरस्त कराने रायपुर पहुंचे। हालांकि मंत्री के प्रवास पर होने के कारण वे उनसे मुलाकात नहीं कर सके और अपना आवेदन कार्यालय में जमा कर लौट आए।

भाजपा के 6 पार्षदों के इस्तीफे से बढ़ी सियासी गर्मी

इसके बाद भाजपा के छह पार्षदों ने पार्टी की प्राथमिक सदस्यता से इस्तीफा देने का फैसला किया। 21 जून की रात से इस संबंध में सोशल मीडिया पर लगातार खबरें और चर्चाएं सामने आने लगीं। इस घटनाक्रम ने राजनीतिक माहौल को और गर्म कर दिया तथा विपक्ष को सरकार और संगठन पर सवाल उठाने का अवसर मिल गया।

संयुक्त संचालक की भूमिका को लेकर भी उठ रहे सवाल

इस पूरे विवाद के बीच कुछ अपुष्ट जानकारियां भी चर्चा में हैं। सोशल मीडिया पर ऐसी बातें सामने आई हैं कि बड़े बचेली स्थानांतरित अधिकारी ने वहां कार्यभार ग्रहण करने की सूचना साझा की है। वहीं यह भी दावा किया जा रहा है कि नगरीय निकाय विभाग के संयुक्त संचालक की भूमिका को लेकर भी सवाल उठ रहे हैं। हालांकि इन दावों की आधिकारिक पुष्टि नहीं हुई है।

प्रशासनिक मामला बना जनचर्चा और राजनीति का केंद्र

केशकाल में एक स्थानांतरण आदेश से शुरू हुआ यह विवाद अब प्रशासनिक, कानूनी और राजनीतिक तीनों स्तरों पर चर्चा का विषय बन चुका है। हाईकोर्ट की अंतरिम राहत, नगर पंचायत में बनी अनिश्चितता और भाजपा पार्षदों के इस्तीफों ने इस पूरे घटनाक्रम को प्रदेश की प्रमुख राजनीतिक चर्चाओं में शामिल कर दिया है। अब सभी की नजर अदालत की अगली सुनवाई और सरकार के अगले कदम पर टिकी हुई है।

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