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छत्तीसगढ़ में सुरक्षा व्यवस्था को लेकर बड़ा फैसला, सभी जिला कलेक्टरों को NSA के तहत विशेष अधिकार

Chhattisgarh's security department has decided to take a major step towards ensuring security, with all district collectors given special powers under the National Security Act (NSA).

रायपुर। छत्तीसगढ़ सरकार ने प्रदेश की आंतरिक सुरक्षा और कानून-व्यवस्था को और मजबूत बनाने के उद्देश्य से अहम प्रशासनिक निर्णय लिया है। गृह विभाग ने राज्य के सभी जिलों के जिला दंडाधिकारियों को राष्ट्रीय सुरक्षा अधिनियम (NSA), 1980 की धारा-3 के तहत विशेष अधिकार प्रदान किए हैं। इसके साथ ही सरकार ने दो प्रतिबंधित संगठनों पर लगी रोक की अवधि भी एक वर्ष के लिए बढ़ा दी है।

33 जिलों में लागू रहेगा आदेश

गृह विभाग के आदेश के अनुसार राज्य के सभी 33 जिलों के जिला दंडाधिकारी राष्ट्रीय सुरक्षा अधिनियम की धारा 3(2) के तहत प्रदत्त शक्तियों का उपयोग कर सकेंगे। सरकार का कहना है कि यह कदम सार्वजनिक व्यवस्था बनाए रखने और संभावित सुरक्षा चुनौतियों से समय रहते निपटने के लिए उठाया गया है।

सांप्रदायिक सौहार्द और कानून-व्यवस्था बनाए रखने पर जोर

सरकार के अनुसार उसे ऐसी सूचनाएं मिली हैं कि कुछ असामाजिक तत्व प्रदेश में सांप्रदायिक सौहार्द बिगाड़ने और सार्वजनिक व्यवस्था प्रभावित करने की कोशिश कर सकते हैं। इन परिस्थितियों को देखते हुए जिला प्रशासन को आवश्यक और एहतियाती कार्रवाई करने के लिए यह अधिकार दिए गए हैं, ताकि किसी भी संभावित खतरे को समय रहते रोका जा सके।

NSA के तहत क्या हैं विशेष अधिकार?

राष्ट्रीय सुरक्षा अधिनियम, 1980 एक निरोधात्मक कानून है। इसके तहत यदि जिला दंडाधिकारी को यह आशंका हो कि किसी व्यक्ति की गतिविधियां देश की सुरक्षा, सार्वजनिक व्यवस्था या शांति के लिए खतरा बन सकती हैं, तो वे उसके खिलाफ निरोधात्मक हिरासत का आदेश जारी कर सकते हैं। इस कानून का उद्देश्य अपराध होने के बाद सजा देना नहीं, बल्कि संभावित खतरे को पहले ही रोकना है।

दो संगठनों पर प्रतिबंध की अवधि बढ़ाई गई

राज्य सरकार ने पीपुल्स लिबरेशन फ्रंट ऑफ इंडिया (पीएलएफआई) और तृतीय प्रस्तुति कमेटी (टीपीसी) पर पहले से लागू प्रतिबंध को एक वर्ष के लिए और बढ़ा दिया है। यह निर्णय 19 जून 2026 से प्रभावी होगा।

गृह विभाग का कहना है कि इन संगठनों की गतिविधियों से सार्वजनिक शांति, कानून-व्यवस्था और लोकतांत्रिक संस्थाओं के सुचारु संचालन पर प्रतिकूल प्रभाव पड़ने की आशंका बनी हुई है। सरकार का मानना है कि आदिवासी क्षेत्रों में चल रहे विकास कार्यों की सुरक्षा, आम नागरिकों में भय का वातावरण समाप्त करने और राज्य में शांति बनाए रखने के लिए प्रतिबंध जारी रखना आवश्यक है।

सुरक्षा एजेंसियां रहेंगी सतर्क

सरकार का कहना है कि राज्य में नक्सल गतिविधियों में लगातार कमी आई है, लेकिन सुरक्षा एजेंसियां अब भी नक्सल समर्थित या उनसे जुड़े संगठनों की गतिविधियों पर नजर बनाए हुए हैं। इसी रणनीति के तहत सुरक्षा व्यवस्था को और प्रभावी बनाने के लिए यह निर्णय लिया गया है।

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