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क्या आपका मेकअप बढ़ा रहा है कैंसर का खतरा? रोजाना इस्तेमाल होने वाले ब्यूटी प्रोडक्ट्स की सच्चाई जानकर हो जाएंगे सतर्क

Is your makeup increasing your risk of cancer? Discover the truth about everyday beauty products and stay cautious.

आज के दौर में मेकअप और स्किनकेयर प्रोडक्ट्स लोगों की रोजमर्रा की जिंदगी का हिस्सा बन चुके हैं। चेहरे की खूबसूरती बढ़ाने के लिए इस्तेमाल किए जाने वाले ये उत्पाद देखने में भले ही आकर्षक लगते हों, लेकिन कुछ शोधों में दावा किया गया है कि इनमें मौजूद कुछ रसायन लंबे समय तक इस्तेमाल करने पर स्वास्थ्य के लिए नुकसानदायक साबित हो सकते हैं। कुछ मामलों में इन्हें कैंसर समेत अन्य गंभीर बीमारियों के बढ़े हुए जोखिम से भी जोड़ा गया है। हालांकि, इसका मतलब यह नहीं है कि हर कॉस्मेटिक उत्पाद कैंसर का कारण बनता है। जोखिम मुख्य रूप से कुछ खास रसायनों के लंबे समय तक और अधिक मात्रा में संपर्क से जुड़ा माना जाता है।

फेस पाउडर और कॉम्पैक्ट में छिपा हो सकता है जोखिम

कुछ फेस पाउडर और कॉम्पैक्ट में इस्तेमाल होने वाले टैल्क में यदि एस्बेस्टस की मिलावट हो, तो उसके महीन कण सांस के जरिए शरीर में पहुंच सकते हैं। एस्बेस्टस के संपर्क को फेफड़ों से जुड़ी गंभीर बीमारियों और कैंसर के जोखिम से जोड़ा गया है। हालांकि, आधुनिक और प्रमाणित उत्पादों में इस तरह की मिलावट पर कड़ी निगरानी रखी जाती है।

हेयर डाई के कुछ केमिकल्स पर भी उठे हैं सवाल

गहरे रंग की कुछ हेयर डाई में पीपीडी और कोल टार आधारित तत्वों का इस्तेमाल किया जाता है। कुछ अध्ययनों में इनके लंबे समय तक अत्यधिक उपयोग को ब्लैडर कैंसर और रक्त संबंधी समस्याओं के बढ़े हुए जोखिम से जोड़ा गया है। इसलिए हेयर डाई का इस्तेमाल हमेशा निर्देशों के अनुसार और जरूरत के हिसाब से करना बेहतर माना जाता है।

नेल पॉलिश और लिपस्टिक भी मांगती हैं सावधानी

कुछ नेल पॉलिश में फॉर्मलाडेहाइड जैसे रसायनों का उपयोग उत्पाद को अधिक टिकाऊ बनाने के लिए किया जाता है। वहीं कुछ लिपस्टिक में लेड और कैडमियम जैसी भारी धातुओं की बेहद कम मात्रा पाई जा सकती है। विशेषज्ञों का कहना है कि लंबे समय तक लगातार संपर्क से इनका शरीर पर प्रतिकूल असर पड़ सकता है, इसलिए गुणवत्ता वाले उत्पाद चुनना जरूरी है।

वॉटरप्रूफ मेकअप और सनस्क्रीन को लेकर भी हो रही है चर्चा

कुछ वॉटरप्रूफ मस्कारा और आईलाइनर में पीएफएएस जैसे रसायन पाए जाने की रिपोर्ट सामने आई हैं। इन्हें ‘फॉरएवर केमिकल्स’ भी कहा जाता है क्योंकि ये लंबे समय तक पर्यावरण और शरीर में बने रह सकते हैं। वहीं कुछ केमिकल आधारित सनस्क्रीन में इस्तेमाल होने वाले ऑक्सीबेंजोन को हार्मोनल बदलाव से जोड़कर देखा गया है। हालांकि इन विषयों पर अभी भी वैज्ञानिक शोध जारी हैं और सभी निष्कर्ष अंतिम नहीं माने जाते।

क्या सभी ब्यूटी प्रोडक्ट्स खतरनाक हैं?

विशेषज्ञों का कहना है कि सीमित मात्रा में और सही तरीके से इस्तेमाल किए गए प्रमाणित कॉस्मेटिक उत्पादों से जोखिम काफी कम माना जाता है। समस्या तब बढ़ सकती है जब घटिया गुणवत्ता वाले उत्पादों का लंबे समय तक और जरूरत से ज्यादा इस्तेमाल किया जाए।

ब्यूटी प्रोडक्ट खरीदते समय रखें इन बातों का ध्यान

कॉस्मेटिक खरीदने से पहले उसके इंग्रीडिएंट्स जरूर पढ़ें। जहां संभव हो वहां पैराबेन-फ्री, टैल्क-फ्री और भरोसेमंद ब्रांड के उत्पादों को प्राथमिकता दें। एक्सपायरी डेट जरूर जांचें और केवल प्रमाणित तथा गुणवत्ता वाले प्रोडक्ट्स का ही इस्तेमाल करें।

ध्यान दें

किसी भी कॉस्मेटिक उत्पाद और कैंसर के बीच सीधा संबंध हर व्यक्ति में समान नहीं होता। उपलब्ध शोध मुख्य रूप से कुछ रसायनों के लंबे समय तक संपर्क से जुड़े संभावित जोखिम की ओर संकेत करते हैं। यदि किसी उत्पाद के इस्तेमाल के बाद त्वचा में जलन, एलर्जी या अन्य समस्या महसूस हो, तो उसका उपयोग बंद कर विशेषज्ञ डॉक्टर से सलाह लेना सबसे सुरक्षित विकल्प है।

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