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कोरबा में फ्लोराइड का कहर, 237 लोग फ्लोरोसिस की चपेट में, गांवों में बढ़ा संकट

Fluoride crisis in Korba: 237 people affected by fluorosis; situation worsens in villages.

कोरबाः जिले में स्वच्छ पेयजल की कमी अब गंभीर स्वास्थ्य संकट में बदलती जा रही है। कई गांवों में फ्लोराइड युक्त पानी लोगों के लिए ‘धीमा जहर’ साबित हो रहा है। हालात यह हैं कि 59 गांवों के कुल 237 लोग फ्लोरोसिस जैसी गंभीर बीमारी की चपेट में आ चुके हैं।

बच्चों से बुजुर्गों तक असर, हड्डियां और दांत सबसे ज्यादा प्रभावित

फ्लोरोसिस का असर हर उम्र के लोगों पर देखा जा रहा है। बच्चों के दांत पीले पड़ रहे हैं, जबकि बुजुर्गों में हड्डियों की कमजोरी और शरीर झुकने जैसी समस्याएं सामने आ रही हैं। स्वास्थ्य विभाग के अनुसार इनमें 214 मरीज डेंटल फ्लोरोसिस और 23 मरीज हड्डियों से जुड़ी समस्या से प्रभावित हैं।

लोग मजबूरी में पी रहे दूषित पानी

ग्रामीणों का कहना है कि स्वच्छ पानी की कोई वैकल्पिक व्यवस्था नहीं होने के कारण उन्हें मजबूरी में फ्लोराइड युक्त पानी ही पीना पड़ रहा है। पीने के पानी की कमी ने स्थिति को और गंभीर बना दिया है, जिससे बीमारी लगातार बढ़ती जा रही है।

स्थायी इलाज नहीं, जीवनभर चलती है बीमारी

विशेषज्ञों के अनुसार फ्लोरोसिस का कोई स्थायी इलाज नहीं है। एक बार प्रभावित होने के बाद मरीज को जीवनभर इसके प्रभावों के साथ रहना पड़ता है। यही वजह है कि यह बीमारी धीरे-धीरे लोगों के जीवन को कमजोर करती जाती है।

सरकारी व्यवस्था पर उठे सवाल

ग्रामीणों और स्वास्थ्य रिपोर्ट के अनुसार लोक स्वास्थ्य यांत्रिकी विभाग की लापरवाही के कारण यह स्थिति बनी है। विभाग का काम स्वच्छ पेयजल उपलब्ध कराना है, लेकिन कई गांवों में अब तक सुरक्षित पानी की व्यवस्था नहीं हो पाई है।

एक साल में सामने आए चौंकाने वाले आंकड़े

स्वास्थ्य विभाग के मुताबिक यह आंकड़े पिछले एक वर्ष में सामने आए हैं। मरीजों की जानकारी संबंधित विभागों को भेजी गई है ताकि जल स्रोतों की जांच और सुधार किया जा सके, लेकिन जमीनी स्तर पर स्थिति में खास सुधार नहीं दिख रहा है।

ग्रामीणों की मांग, जल्द मिले शुद्ध पेयजल व्यवस्था

प्रभावित गांवों के लोग अब शुद्ध पेयजल व्यवस्था और स्थायी समाधान की मांग कर रहे हैं। उनका कहना है कि अगर जल्द कदम नहीं उठाए गए तो आने वाले समय में स्थिति और भयावह हो सकती है।

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