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सीजीपीएससी भर्ती विवाद में जांच तेज: सेवानिवृत्त आईएएस के घर छापा, भर्ती प्रक्रिया पर उठे नए सवाल

Investigation Intensifies in CGPSC Recruitment Scandal: Retired IAS Officer's Residence Raided; New Questions Raised Over Recruitment Process

 भिलाई: छत्तीसगढ़ के बहुचर्चित सीजीपीएससी भर्ती विवाद में जांच एजेंसियों की सक्रियता लगातार बढ़ती जा रही है. बुधवार तड़के भिलाई के सेक्टर-10 स्थित सेवानिवृत्त आईएएस अधिकारी जेके ध्रुव के निवास पर छापेमार कार्रवाई की गई. सुबह करीब दो बजे अधिकारियों की टीम पहुंची और दस्तावेजों की गहन जांच शुरू कर दी.

कार्रवाई के दौरान आवास के बाहर सुरक्षा व्यवस्था भी बढ़ा दी गई. हालांकि अभी तक यह स्पष्ट नहीं किया गया है कि जांच किस एजेंसी द्वारा की जा रही है और न ही कोई आधिकारिक बयान जारी किया गया है.

भर्ती प्रक्रिया में अनियमितताओं के आरोपों ने पकड़ी रफ्तार

सीजीपीएससी भर्ती विवाद वर्ष 2020 से 2022 के बीच आयोजित राज्य सेवा परीक्षाओं से जुड़ा हुआ है. आरोप हैं कि चयन प्रक्रिया में गंभीर अनियमितताएं हुईं और प्रभावशाली लोगों के परिजनों को लाभ पहुंचाने के लिए गोपनीय जानकारी का दुरुपयोग किया गया.

जांच के दौरान तत्कालीन आयोग अध्यक्ष टामन सिंह सोनवानी की भूमिका पर भी सवाल उठे हैं. आरोप है कि पद का दुरुपयोग कर करीबी लोगों को चयन प्रक्रिया में लाभ पहुंचाया गया.

पूर्व परीक्षा नियंत्रक और अन्य अधिकारियों की भूमिका जांच के घेरे में

जांच एजेंसियों के अनुसार तत्कालीन परीक्षा नियंत्रक आरती वासनिक तथा उप परीक्षा नियंत्रक ललित गनवीर की भूमिका भी जांच के दायरे में है.

आरोप है कि भर्ती प्रक्रिया से जुड़े गोपनीय दस्तावेजों और प्रश्नपत्रों के प्रबंधन में गंभीर अनियमितताएं हुईं. इसी कारण कई चयनों की निष्पक्षता पर प्रश्नचिह्न खड़े हुए हैं.

उच्च न्यायालय से नहीं मिली राहत

मामले में आरोपित पक्षों द्वारा दायर जमानत याचिकाओं पर सुनवाई के दौरान न्यायालय ने जांच एजेंसी की दलीलों को महत्व देते हुए राहत देने से इनकार कर दिया. न्यायालय ने माना कि मामले की जांच अभी जारी है और आरोपों की गंभीरता को देखते हुए इस स्तर पर राहत देना उचित नहीं होगा.

शीर्ष चयन सूची पर उठे सवाल

जांच में यह तथ्य भी सामने आया कि शीर्ष चयन सूची में शामिल कई अभ्यर्थी प्रभावशाली अधिकारियों, नेताओं और कारोबारियों से जुड़े हुए बताए गए. इसके बाद पूरी चयन प्रक्रिया की पारदर्शिता पर सवाल उठे और मामला न्यायालय तक पहुंचा.

कोलकाता से रायपुर तक फैली जांच की कड़ियां

जांच एजेंसियों के अनुसार प्रश्नपत्रों की छपाई का कार्य कोलकाता स्थित एक निजी संस्था को सौंपा गया था. जांच में यह भी देखा जा रहा है कि प्रश्नपत्रों की सुरक्षा और गोपनीयता से जुड़ी प्रक्रियाओं का पालन किस स्तर तक हुआ और कहीं किसी स्तर पर नियमों का उल्लंघन तो नहीं हुआ.

171 पदों की भर्ती बनी जांच का केंद्र

राज्य सेवा परीक्षा 2021 के माध्यम से 171 पदों पर भर्ती की प्रक्रिया शुरू हुई थी. प्रारंभिक परीक्षा, मुख्य परीक्षा और साक्षात्कार के बाद अंतिम चयन सूची जारी की गई थी. अब इसी भर्ती प्रक्रिया की निष्पक्षता और पारदर्शिता की जांच की जा रही है.

आने वाले दिनों में हो सकते हैं और बड़े खुलासे

लगातार हो रही छापेमार कार्रवाई और दस्तावेजों की जांच से संकेत मिल रहे हैं कि जांच का दायरा और बढ़ सकता है. प्रशासनिक और राजनीतिक हलकों में भी इस मामले को लेकर चर्चा तेज हो गई है. जांच एजेंसियों की अगली कार्रवाई पर सभी की निगाहें टिकी हुई हैं.

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