सावन स्पेशल: जशपुर से बस्तर तक छत्तीसगढ़ के 8 चमत्कारी शिवधाम, जहां जलाभिषेक और दर्शन के लिए हर साल उमड़ता है श्रद्धालुओं का सैलाब

सावन का पवित्र महीना भगवान शिव की आराधना के लिए सबसे शुभ माना जाता है। शिवधाम की यात्रा करने के लिए देशभर से श्रद्धालु छत्तीसगढ़ पहुंचते हैं। यहां कई ऐसे प्राचीन और ऐतिहासिक शिव मंदिर हैं, जो अपनी आस्था, चमत्कार, वास्तुकला और प्राकृतिक सुंदरता के लिए प्रसिद्ध हैं। सावन के दौरान इन मंदिरों में जलाभिषेक, रुद्राभिषेक और विशेष पूजा-अर्चना के लिए हजारों श्रद्धालुओं की भीड़ उमड़ती है।
- मधेश्वर महादेव धाम (जशपुर)
जशपुर जिले की मयाली पहाड़ी पर स्थित मधेश्वर महादेव प्राकृतिक शिवलिंग और घने जंगलों के बीच बसे शांत वातावरण के लिए प्रसिद्ध है। सावन में यहां बड़ी संख्या में श्रद्धालु पहुंचते हैं।
- भोरमदेव मंदिर (कवर्धा)
‘छत्तीसगढ़ का खजुराहो’ कहलाने वाला भोरमदेव मंदिर अपनी अद्भुत पत्थर नक्काशी और प्राचीन स्थापत्य कला के लिए देशभर में प्रसिद्ध है। यह मंदिर धार्मिक और पर्यटन दोनों दृष्टि से महत्वपूर्ण है।
- हटकेश्वर महादेव मंदिर (रायपुर)
महादेव घाट स्थित हटकेश्वर महादेव मंदिर 15वीं शताब्दी की ऐतिहासिक धरोहर माना जाता है। सावन में यहां जलाभिषेक के लिए श्रद्धालुओं की लंबी कतारें लगती हैं।
- कुलेश्वर महादेव (राजिम)
राजिम के त्रिवेणी संगम पर स्थित कुलेश्वर महादेव मंदिर का धार्मिक महत्व सदियों पुराना है। संगम में स्नान और शिव दर्शन का विशेष महत्व माना जाता है।
- लक्ष्मणेश्वर महादेव (खरौद)
खरौद स्थित लक्ष्मणेश्वर महादेव मंदिर प्रदेश के सबसे प्राचीन शिव मंदिरों में गिना जाता है। इसकी ऐतिहासिक और धार्मिक पहचान पूरे देश में है।
- भूतेश्वर महादेव (गरियाबंद)
गरियाबंद जिले के मरौदा गांव में स्थित भूतेश्वर महादेव अपने स्वयंभू शिवलिंग के लिए प्रसिद्ध है। स्थानीय मान्यता है कि इस शिवलिंग का आकार समय के साथ लगातार बढ़ रहा है।
- जलेश्वर महादेव (बारसूर, बस्तर)
बस्तर के बारसूर में स्थित जलेश्वर महादेव मंदिर प्राचीन शैव स्थापत्य का शानदार उदाहरण माना जाता है। यहां का ऐतिहासिक महत्व श्रद्धालुओं को विशेष रूप से आकर्षित करता है।
- जलेश्वर धाम (अमरकंटक मार्ग)
अमरकंटक मार्ग पर स्थित जलेश्वर धाम प्राकृतिक जलकुंड और शांत वातावरण के कारण श्रद्धालुओं के बीच विशेष पहचान रखता है। सावन में यहां बड़ी संख्या में श्रद्धालु दर्शन के लिए पहुंचते हैं।
सावन में बढ़ जाता है धार्मिक पर्यटन
सावन और महाशिवरात्रि के दौरान इन सभी शिवधाम में विशेष धार्मिक आयोजन होते हैं। श्रद्धालुओं की सुविधा के लिए सड़क, पेयजल, प्रकाश व्यवस्था, सीढ़ियां और अन्य मूलभूत सुविधाओं का भी विकास किया गया है। धार्मिक विशेषज्ञों के अनुसार, ये शिवधाम केवल पूजा-अर्चना के केंद्र नहीं, बल्कि छत्तीसगढ़ की सांस्कृतिक, ऐतिहासिक और आध्यात्मिक विरासत की भी अमूल्य धरोहर हैं।



