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मध्य प्रदेश का ऐसा पारंपरिक स्वाद, जिसे एक बार चख लिया तो बार-बार खाने का करेगा मन, जानिए दाल-बाफला की खासियत और आसान रेसिपी

Experience the traditional taste of Madhya Pradesh—once you taste it, you’ll crave it again and again; discover the unique qualities and an easy recipe for Dal-Bafla.

मध्य प्रदेश अपनी ऐतिहासिक धरोहर, भव्य महलों और समृद्ध संस्कृति के साथ-साथ अपने लजीज पारंपरिक व्यंजनों के लिए भी पूरे देश में अलग पहचान रखता है। यहां का स्ट्रीट फूड और पारंपरिक खानपान हर खाने के शौकीन का दिल जीत लेता है। इन्हीं खास व्यंजनों में सबसे प्रमुख नाम है दाल-बाफला का, जिसका स्वाद लोगों को पहली ही बार में अपना दीवाना बना देता है। अगर आपने अभी तक इसे नहीं चखा है, तो इसकी खासियत और आसान रेसिपी जानने के बाद इसे घर पर जरूर बनाना चाहेंगे।

मालवा की शान है दाल-बाफला, हर खास मौके की पहली पसंद

मध्य प्रदेश के मालवा क्षेत्र में दाल-बाफला सिर्फ एक व्यंजन नहीं, बल्कि परंपरा का हिस्सा माना जाता है। शादी, त्योहार, पारिवारिक समारोह या किसी नई शुरुआत का अवसर हो, भोजन की थाली में दाल-बाफला जरूर शामिल किया जाता है। इसका भरपूर स्वाद और देसी अंदाज इसे प्रदेश की पहचान बना चुका है। यही कारण है कि देश-विदेश से आने वाले पर्यटक भी इसका स्वाद लेने का मौका नहीं छोड़ते।

दाल-बाटी जैसा दिखता है, लेकिन स्वाद और बनाने का तरीका है बिल्कुल अलग

पहली नजर में दाल-बाफला देखने में राजस्थान की दाल-बाटी जैसा लगता है, इसलिए कई लोग दोनों को एक ही व्यंजन समझ लेते हैं। लेकिन असलियत में दोनों के स्वाद और बनाने की प्रक्रिया में काफी अंतर होता है। दाल-बाफला पहले उबाला जाता है और उसके बाद भट्टी या कंडों की आंच पर सेंका जाता है। यही तरीका इसे अधिक मुलायम, स्वादिष्ट और अलग बनाता है।

भोपाल और इंदौर जाएं तो इस स्वाद का अनुभव करना न भूलें

अगर आप मध्य प्रदेश की यात्रा पर हैं, खासकर भोपाल या इंदौर जा रहे हैं, तो दाल-बाफला का स्वाद जरूर लें। देसी घी की खुशबू, मसालेदार दाल और पारंपरिक अंदाज में परोसा गया यह व्यंजन हर उम्र के लोगों को पसंद आता है। यही वजह है कि विदेशी पर्यटक भी इसे मध्य प्रदेश की सबसे यादगार फूड डिश में शामिल करते हैं।

घर पर ऐसे तैयार करें स्वादिष्ट दाल-बाफला

दाल-बाफला बनाने के लिए सबसे पहले गेहूं के आटे में थोड़ा सूजी, नमक और घी मिलाकर सख्त आटा गूंथ लें। इसके बाद आटे की मध्यम आकार की गोल लोइयां तैयार करें। इन लोइयों को उबलते पानी में तब तक पकाएं, जब तक वे ऊपर तैरने न लगें।

अब उबले हुए बाफलों को भट्टी, तंदूर, ओवन या धीमी आंच पर सुनहरा होने तक सेंक लें। अच्छी तरह सिकने के बाद इन्हें गर्मागर्म शुद्ध देसी घी में डुबो दें।

इसके साथ तुअर की मसालेदार दाल तैयार करें। दाल में जीरा, हींग, लहसुन, हरी मिर्च, टमाटर और पारंपरिक मसालों का तड़का लगाएं। आखिर में घी में डूबे गर्म बाफलों को चटपटी दाल, हरी चटनी, अचार और सलाद के साथ परोसें। इसका लाजवाब स्वाद हर खाने को खास बना देता है।

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