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राम चरण की ‘पेद्दी’ को विदेशों में बड़ा झटका! रिपोर्ट में 18 करोड़ रुपये के नुकसान का दावा, डिस्ट्रीब्यूटर्स की बढ़ी चिंता

Major setback for Ram Charan's 'Peddi' overseas! Report claims a loss of ₹18 crore; distributors' concerns mount.

हैदराबाद। राम चरण की फिल्म ‘पेद्दी’ घरेलू बॉक्स ऑफिस पर दमदार प्रदर्शन कर रही है, लेकिन ओवरसीज मार्केट को लेकर सामने आई एक रिपोर्ट ने ट्रेड सर्किल में नई चर्चा छेड़ दी है। दावा किया जा रहा है कि फिल्म के विदेशी वितरण से जुड़े खरीदारों को भारी आर्थिक नुकसान उठाना पड़ रहा है। हालांकि, इस संबंध में निर्माताओं की ओर से कोई आधिकारिक पुष्टि नहीं की गई है।

ऊंची कीमत पर बिके थे ओवरसीज राइट्स, अब बढ़ी खरीदारों की मुश्किलें

मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक, फिल्म के ओवरसीज राइट्स काफी ऊंची कीमत पर बेचे गए थे। रिलीज से पहले ‘चिकिरी’ गाने और फिल्म को लेकर बने माहौल के कारण विदेशी बाजार में बड़ी कमाई की उम्मीद थी, लेकिन वास्तविक प्रदर्शन उस स्तर तक नहीं पहुंच पाया। रिपोर्ट में दावा किया गया है कि ओवरसीज डिस्ट्रीब्यूटर्स को करीब 18 करोड़ रुपये का नुकसान होने की आशंका है।

कमाई अच्छी, लेकिन ब्रेक ईवन लक्ष्य से अभी भी दूर

बताया जा रहा है कि फिल्म ने रिलीज के 13 दिनों में विदेशों में लगभग 52.20 करोड़ रुपये का ग्रॉस कलेक्शन किया है। हालांकि, निवेश की भरपाई और मुनाफे के लिए करीब 85 करोड़ रुपये के कलेक्शन की जरूरत थी। ऐसे में अच्छी कमाई के बावजूद फिल्म ओवरसीज मार्केट में तय लक्ष्य से काफी पीछे बताई जा रही है।

भारत में शानदार प्रदर्शन, दुनिया भर में 400 करोड़ के पार पहुंचा कारोबार

घरेलू बाजार में ‘पेद्दी’ का प्रदर्शन मजबूत बना हुआ है। रिपोर्ट के अनुसार, 13वें दिन तक फिल्म ने भारत में करीब 223.55 करोड़ रुपये का नेट कलेक्शन किया, जबकि दुनिया भर में इसका ग्रॉस कलेक्शन 400 करोड़ रुपये का आंकड़ा पार कर चुका है। इसी के साथ फिल्म ओवरसीज कमाई के मामले में शीर्ष तेलुगु फिल्मों की सूची में भी अपनी जगह मजबूत करने की ओर बढ़ रही है।

नॉर्थ अमेरिका में उम्मीद से कम मिला रिस्पॉन्स

ट्रेड विश्लेषकों का मानना है कि फिल्म की ओवरसीज प्राइसिंग अपेक्षाकृत अधिक रखी गई थी। खासकर नॉर्थ अमेरिका से बेहतर प्रदर्शन की उम्मीद थी, लेकिन वहां फिल्म करीब 3.35 मिलियन अमेरिकी डॉलर का कारोबार ही कर सकी, जबकि ब्रेक ईवन के लिए लगभग 6.5 मिलियन डॉलर की जरूरत बताई जा रही थी। इसके अलावा हिंदी और अन्य डब संस्करणों से भी अपेक्षित समर्थन नहीं मिला।

क्या डिस्ट्रीब्यूटर्स को मिलेगी राहत?

अब फिल्म इंडस्ट्री की नजर इस बात पर टिकी है कि क्या निर्माता ओवरसीज डिस्ट्रीब्यूटर्स को किसी तरह की राहत देंगे। तेलुगु फिल्म इंडस्ट्री में पहले भी ऐसे उदाहरण देखने को मिले हैं, जब भारी नुकसान की स्थिति में निर्माताओं ने वितरकों की आर्थिक मदद की थी। फिलहाल ‘पेद्दी’ के मामले में किसी आधिकारिक फैसले का इंतजार किया जा रहा है।

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