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महाकुंभ की वायरल गर्ल मोनालिसा की शादी पहुंची हाई कोर्ट, उम्र और दस्तावेजों को लेकर छिड़ी बड़ी कानूनी जंग

Marriage of 'Mahakumbh Viral Girl' Monalisa reaches High Court; major legal battle erupts over age and documents.

महाकुंभ मेले से रातोंरात सोशल मीडिया स्टार बनीं मोनालिसा और उनके पति फरमान खान की शादी का मामला अब हाई कोर्ट की चौखट तक पहुंच गया है। शुक्रवार को इस मामले में अदालत में सुनवाई हुई, लेकिन याचिका में कुछ तकनीकी कमियां और दस्तावेजों को लेकर उठे सवालों के चलते कोर्ट ने अगली सुनवाई 23 जून तक के लिए टाल दी। अब इस बहुचर्चित मामले पर सभी की निगाहें टिकी हुई हैं।

महाकुंभ से मिली पहचान, फिर शुरू हुई नई कहानी

मध्य प्रदेश के खरगोन जिले की रहने वाली मोनालिसा पिछले साल प्रयागराज महाकुंभ में रुद्राक्ष की माला बेचते हुए सोशल मीडिया पर वायरल हो गई थीं। उनकी सादगी और अनोखे अंदाज ने लोगों का ध्यान खींचा और देखते ही देखते वह इंटरनेट सेंसेशन बन गईं। लोकप्रियता बढ़ने के साथ उन्हें मनोरंजन जगत से भी प्रस्ताव मिलने लगे।

बताया जा रहा है कि एक फिल्म की शूटिंग के दौरान केरल में उनकी मुलाकात फरमान खान से हुई। दोस्ती धीरे-धीरे प्यार में बदली और दोनों ने मार्च 2026 में शादी कर ली।

शादी के बाद विवादों में घिरा मामला

विवाह के कुछ समय बाद मामला उस वक्त तूल पकड़ गया, जब प्रारंभिक जांच में यह आशंका जताई गई कि शादी के समय मोनालिसा की उम्र 18 वर्ष से कम हो सकती थी। इसके बाद फरमान खान के खिलाफ पॉक्सो एक्ट समेत विभिन्न धाराओं में मामला दर्ज कर लिया गया।

यही नहीं, विवाह में इस्तेमाल किए गए दस्तावेजों की वैधता पर भी सवाल उठाए गए, जिसके बाद यह मामला कानूनी और सामाजिक बहस का विषय बन गया।

पिता पर लगाए गंभीर आरोप

हाई कोर्ट में दायर याचिका में मोनालिसा ने अपने पिता पर गंभीर आरोप लगाए हैं। उनका कहना है कि शादी का विरोध करने के लिए उन्हें नाबालिग साबित करने की साजिश रची गई।

याचिका में दावा किया गया है कि—

  • उनके छोटे भाई के दस्तावेजों को उनका बताकर पेश किया गया।
  • जन्म संबंधी रिकॉर्ड में कथित हेरफेर किया गया।
  • उनके असली जन्म प्रमाणपत्र को बिना उचित प्रक्रिया अपनाए निरस्त कर दिया गया।
  • उनके और उनके पति के खिलाफ दर्ज एफआईआर भी इसी कथित साजिश का हिस्सा है।

मोनालिसा का कहना है कि वह बालिग हैं और उनका विवाह पूरी तरह कानूनी रूप से वैध है।

विवाह को सांप्रदायिक रंग देने का भी आरोप

याचिका में यह भी कहा गया है कि कुछ लोगों ने सोशल मीडिया पर फरमान खान के खिलाफ अभियान चलाकर इस विवाह को ‘लव जिहाद’ जैसे विवादित मुद्दों से जोड़ने की कोशिश की। दंपति का आरोप है कि उनके निजी फैसले को जानबूझकर विवादित बनाया गया और सामाजिक दबाव बनाने का प्रयास किया गया।

हाई कोर्ट में क्या हुआ?

सुनवाई के दौरान याचिकाकर्ता पक्ष की ओर से वरिष्ठ अधिवक्ता वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के माध्यम से पेश हुए। राज्य सरकार की ओर से याचिका में कुछ तकनीकी त्रुटियों और जन्म प्रमाणपत्र की प्रतियों को लेकर आपत्ति दर्ज कराई गई।

हालांकि, सुनवाई के दौरान जन्म प्रमाणपत्र की मूल प्रति अदालत में प्रस्तुत की गई। इसके बाद कोर्ट ने याचिकाकर्ता पक्ष को दस्तावेजों की प्रमाणित प्रतियां जमा करने और याचिका में मौजूद कमियों को दूर करने के लिए 10 दिन का समय दिया।

23 जून को फिर होगी सुनवाई

हाई कोर्ट ने मामले की अगली सुनवाई 23 जून तय की है। अब अदालत में उम्र, जन्म प्रमाणपत्र की वैधता, एफआईआर की परिस्थितियां और कथित साजिश जैसे कई महत्वपूर्ण मुद्दों पर विस्तार से बहस होगी।

कई सवालों के जवाब तलाश रही अदालत

मोनालिसा और फरमान खान का मामला अब सिर्फ एक विवाह विवाद नहीं रह गया है। यह दस्तावेजों की प्रमाणिकता, पारिवारिक विरोध, कानूनी प्रक्रियाओं और व्यक्तिगत स्वतंत्रता से जुड़े कई अहम सवालों का केंद्र बन चुका है। आने वाली सुनवाई इस पूरे विवाद की दिशा और भविष्य तय कर सकती है।

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