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पटवारी पर रिश्वत का गंभीर आरोप : 8000 रुपये लेने के बाद भी नहीं हुआ नक्शा अपडेट, किसान दर-दर भटकने को मजबूर

Serious bribery allegation against Patwari: Map not updated despite payment of ₹8,000; farmer forced to run from pillar to post.

 सरगुजा:  लखनपुर इलाके से राजस्व व्यवस्था पर सवाल खड़े करने वाला एक गंभीर मामला सामने आया है। एक किसान ने पटवारी पर जमीन के सीमांकन और नक्शा अपडेट करने के नाम पर 8000 रुपये रिश्वत लेने का आरोप लगाया है। इसके बावजूद काम पूरा नहीं होने से किसान लगातार दफ्तरों के चक्कर काटने को मजबूर है।

रिश्वत लेने के बाद भी नहीं हुआ काम पूरा

जानकारी के अनुसार गोरता गांव निवासी पूरन राम ने आरोप लगाया है कि संबंधित पटवारी ने जमीन का नक्शा अपडेट और सीमांकन करने के लिए उससे 8000 रुपये लिए थे। लेकिन रिश्वत लेने के बाद भी न तो नक्शा अपडेट किया गया और न ही सीमांकन की प्रक्रिया पूरी हुई।पीड़ित किसान के अनुसार, तहसीलदार न्यायालय से पहले ही सीमांकन और नक्शा सुधार का आदेश जारी हो चुका है, इसके बावजूद काम अटका हुआ है।

अब दूसरे पटवारी के पास भी लंबित मामला

स्थानीय लोगों के अनुसार पहले जिस पटवारी पर आरोप लगे, उसके स्थान पर अब दूसरे पटवारी की तैनाती की गई है। लेकिन नई तैनाती के बावजूद भी काम आगे नहीं बढ़ सका है, जिससे किसान की परेशानी कम होने के बजाय बढ़ती जा रही है।

किसान ने सुनाई दर्दभरी कहानी

कलेक्टोरेट पहुंचे किसान पूरन राम ने बताया कि उसके बेटे मजदूरी और बर्फ बेचकर किसी तरह 8000 रुपये जुटाए थे। यह राशि दो महीने की मेहनत के बाद जमा हुई थी, जिसे उसने कथित रूप से पटवारी को दे दिया। इसके बावजूद उसका काम नहीं हुआ।

दफ्तरों के चक्कर में खत्म हो रही बचत

किसान का कहना है कि वह पिछले कई सालों से अपने जमीन विवाद को सुलझाने के लिए तहसील कार्यालय के चक्कर लगा रहा है। इस दौरान वह 40 से 50 हजार रुपये तक खर्च कर चुका है, लेकिन अभी तक उसे न्याय नहीं मिला है।

जमीन पर निर्माण, बढ़ी मुश्किलें

पीड़ित के अनुसार उसकी जमीन पर अब दूसरे लोगों द्वारा निर्माण कार्य भी शुरू कर दिया गया है, जिससे विवाद और जटिल हो गया है। वह लगातार प्रशासन से मदद की गुहार लगा रहा है।

प्रशासनिक व्यवस्था पर उठे सवाल

इस मामले ने एक बार फिर राजस्व विभाग की कार्यप्रणाली और पारदर्शिता पर सवाल खड़े कर दिए हैं। जहां एक ओर सरकार जनसमस्याओं के समाधान के लिए शिविर और अभियान चला रही है, वहीं दूसरी ओर जमीन संबंधी मामलों में भ्रष्टाचार और देरी की शिकायतें सामने आ रही हैं।

अब कार्रवाई का इंतजार

फिलहाल पीड़ित किसान न्याय की उम्मीद में अधिकारियों के पास गुहार लगा रहा है। अब देखना होगा कि प्रशासन इस मामले में क्या कार्रवाई करता है और किसान को कब तक राहत मिल पाती है।

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