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महुआ से मिलेट्स तक: ‘मोहला’ ब्रांड ने गढ़ी आत्मनिर्भरता की नई मिसाल, मुख्यमंत्री साय ने की खुलकर तारीफ

From Mahua to Millets: 'Mohla' brand sets a new benchmark for self-reliance; Chief Minister Sai heaps praise.

रायपुर। छत्तीसगढ़ के ग्रामीण क्षेत्रों में महिलाओं और किसानों की मेहनत अब एक नई पहचान के साथ सामने आ रही है। राष्ट्रीय ग्रामीण आजीविका मिशन (NRLM) के तहत स्व-सहायता समूहों और किसान उत्पादक संगठनों द्वारा तैयार किए जा रहे स्थानीय उत्पादों को ‘मोहला’ ब्रांड के रूप में विकसित किया गया है। मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय ने इस पहल की सराहना करते हुए इसे ग्रामीण उद्यमिता और आत्मनिर्भरता का मजबूत उदाहरण बताया।

स्थानीय स्वाद और पोषण का अनोखा संगम बना ‘मोहला’

‘मोहला’ ब्रांड के तहत जिले की महिला समूहों और एफपीओ द्वारा महुआ का अचार, शुद्ध वन शहद, रागी लड्डू, मिलेट्स कुकीज, कोदो चावल, रागी आटा सहित कई पारंपरिक और पौष्टिक उत्पाद तैयार किए जा रहे हैं। इन उत्पादों में स्थानीय संस्कृति, गुणवत्ता और पोषण का समावेश देखने को मिलता है, जो जिले की विशिष्ट पहचान को राष्ट्रीय स्तर तक पहुंचाने की क्षमता रखते हैं।

मुख्यमंत्री को भेंट किए गए ‘मोहला’ ब्रांड के उत्पाद

महिलाओं और किसानों के इस प्रयास को प्रोत्साहन देने के लिए कलेक्टर तूलिका प्रजापति और जिला पंचायत सीईओ भारती चंद्राकर ने मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय को ‘मोहला’ ब्रांड के विभिन्न उत्पाद भेंट किए। इस दौरान मुख्यमंत्री ने उत्पादों की गुणवत्ता और ब्रांड की अवधारणा की प्रशंसा की।

आदिवासी अंचल से निकली प्रेरणादायक पहल

मुख्यमंत्री साय ने कहा कि मोहला-मानपुर-अंबागढ़ चौकी जैसे वनांचल और आदिवासी क्षेत्र में स्थानीय संसाधनों के आधार पर जिला स्तरीय ब्रांड विकसित करना बेहद सराहनीय कदम है। उन्होंने कहा कि यह सिर्फ उत्पादों का व्यापारिक मंच नहीं है, बल्कि ग्रामीण अर्थव्यवस्था को मजबूती देने और स्थानीय लोगों को आत्मनिर्भर बनाने का प्रभावी माध्यम भी है।

महुआ को मिली आधुनिक बाजार की नई राह

मुख्यमंत्री ने कहा कि महुआ छत्तीसगढ़ की सांस्कृतिक और आर्थिक विरासत का अहम हिस्सा है। महुआ आधारित उत्पादों को आधुनिक पैकेजिंग और ब्रांडिंग के जरिए बाजार से जोड़ना स्थानीय समुदायों की आय बढ़ाने की दिशा में महत्वपूर्ण पहल है। उन्होंने इस नवाचार से जुड़े सभी स्व-सहायता समूहों, किसान उत्पादक संगठनों और जिला प्रशासन को बधाई दी।

महिलाओं और किसानों की मेहनत का प्रतीक बना ब्रांड

कलेक्टर तूलिका प्रजापति ने कहा कि ‘मोहला’ ब्रांड जिले की महिलाओं और किसानों के कौशल, परिश्रम और उद्यमशीलता का प्रतीक बन चुका है। इससे न केवल स्थानीय उत्पादों को नई पहचान मिल रही है, बल्कि ग्रामीण परिवारों की आय में भी वृद्धि हो रही है और रोजगार के नए अवसर पैदा हो रहे हैं।

बड़े बाजारों तक पहुंचाने की तैयारी

जिला पंचायत सीईओ भारती चंद्राकर ने बताया कि ‘मोहला’ ब्रांड के उत्पादों को व्यापक बाजार उपलब्ध कराने के लिए बेहतर पैकेजिंग, ब्रांडिंग और विपणन पर लगातार काम किया जा रहा है। आने वाले समय में इसे जिले की प्रमुख पहचान के रूप में स्थापित करने की योजना है।

ग्रामीण विकास की नई कहानी लिख रहा ‘मोहला’

आज ‘मोहला’ केवल एक ब्रांड नहीं, बल्कि महिलाओं, किसानों, स्व-सहायता समूहों और एफपीओ की सामूहिक सफलता का प्रतीक बनकर उभरा है। यह पहल दिखाती है कि जब स्थानीय संसाधनों को नवाचार, गुणवत्ता और मजबूत ब्रांडिंग से जोड़ा जाता है, तब ग्रामीण अर्थव्यवस्था में बड़े बदलाव की नींव रखी जा सकती है।

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