बसनामहासमुंद

मानसून में भी बिजली व्यवस्था बेपटरी: बसना-लीमदरहा सबस्टेशन क्षेत्र के ग्रामीणों का फूटा गुस्सा, घंटों की अघोषित कटौती से जनजीवन अस्त-व्यस्त

बसना। महासमुंद जिले के बसना विकासखंड अंतर्गत लीमदरहा सबस्टेशन से जुड़े ढालम, भुवनेश्वरपुर, डोंगरीपाली, रामभाठा, चनाट, रंगमटिया, दलदली, लीमदरहा सहित आसपास के दर्जनों गांवों के ग्रामीण इन दिनों बिजली विभाग की कार्यप्रणाली से बेहद नाराज हैं। लगातार हो रही अघोषित बिजली कटौती ने लोगों का धैर्य जवाब दे दिया है। ग्रामीणों का आरोप है कि हल्की बारिश या मामूली हवा चलने पर भी बिजली घंटों तक गुल हो जाती है। स्थिति ऐसी बन गई है कि दिन में कई-कई बार बिजली बंद हो जाती है और कई बार घंटों तक आपूर्ति बहाल नहीं होती।

ग्रामीणों का कहना है कि गर्मी के पूरे मौसम में बिजली विभाग ने मानसून पूर्व रखरखाव (मेंटेनेंस) के नाम पर लंबे-लंबे समय तक बिजली बंद रखी। विभाग की ओर से पेड़ों की कटाई-छंटाई, लाइन सुधार और अन्य तकनीकी कार्यों का हवाला देकर घंटों तक बिजली आपूर्ति बाधित की गई। उस समय उपभोक्ताओं को यह भरोसा दिलाया गया था कि मानसून के दौरान बिजली व्यवस्था सुचारु रहेगी और बार-बार फाल्ट की समस्या नहीं आएगी।

लेकिन अब बरसात शुरू होते ही वास्तविकता सामने आ गई है। ग्रामीणों का कहना है कि विभाग के सभी दावों की पोल खुल चुकी है। हल्की बारिश, सामान्य हवा या बादल छाने भर से बिजली आपूर्ति ठप हो जाती है। कई बार पूरे क्षेत्र में घंटों तक अंधेरा पसरा रहता है। इससे साफ प्रतीत होता है कि मानसून पूर्व किए गए रखरखाव कार्य अपेक्षित स्तर पर नहीं हुए या फिर उनमें गंभीर लापरवाही बरती गई।

सबसे अधिक परेशानी विद्यार्थियों को झेलनी पड़ रही है। स्कूल और कॉलेज के छात्र-छात्राएं पढ़ाई के दौरान बार-बार बिजली जाने से परेशान हैं। कई विद्यार्थियों की ऑनलाइन पढ़ाई और प्रतियोगी परीक्षाओं की तैयारी प्रभावित हो रही है। शाम होते ही बिजली कटने से बच्चों को पर्याप्त रोशनी नहीं मिल पाती, जिससे उनकी पढ़ाई बाधित होती है।

व्यापारी वर्ग भी लगातार हो रही बिजली कटौती से नुकसान उठा रहा है। छोटे दुकानदारों, वेल्डिंग, फोटो कॉपी, साइबर कैफे, मोबाइल रिपेयरिंग, किराना और अन्य व्यवसायों का काम बार-बार रुक जाता है। बिजली पर निर्भर छोटे उद्योग और प्रतिष्ठान भी प्रभावित हो रहे हैं। व्यापारियों का कहना है कि अघोषित कटौती के कारण ग्राहकों को भी असुविधा होती है और आर्थिक नुकसान उठाना पड़ता है।

ग्रामीणों ने बताया कि बिजली जाने की कोई निश्चित समय-सारिणी नहीं है। विभाग की ओर से पूर्व सूचना भी नहीं दी जाती। कई बार दिन में चार से पांच बार बिजली बंद हो जाती है। कब आएगी और कब जाएगी, इसकी जानकारी किसी को नहीं रहती। उपभोक्ता लगातार इंतजार करते रहते हैं, लेकिन विभाग की ओर से कोई स्पष्ट सूचना उपलब्ध नहीं कराई जाती।

बरसात के मौसम में यह समस्या और गंभीर हो जाती है। गांवों में पहले से ही सांप, बिच्छू तथा अन्य विषैले जीव-जंतुओं का खतरा बना रहता है। रात के समय घंटों तक बिजली नहीं रहने से लोगों को अंधेरे में आवागमन करना पड़ता है, जिससे दुर्घटनाओं और विषैले जीवों के काटने का खतरा बढ़ जाता है। महिलाओं, बुजुर्गों और बच्चों को सबसे अधिक कठिनाइयों का सामना करना पड़ रहा है।

ग्रामीणों का आरोप है कि बिजली विभाग के अधिकारी और जिम्मेदार कर्मचारी शिकायतों को गंभीरता से नहीं लेते। बिजली गुल होने पर जब उपभोक्ता संबंधित अधिकारियों या कर्मचारियों को फोन करते हैं तो अधिकांश समय फोन रिसीव नहीं किया जाता। कई बार मोबाइल बंद मिलता है या घंटी बजती रहती है, लेकिन कोई जवाब नहीं मिलता। इससे लोगों में विभाग के प्रति आक्रोश लगातार बढ़ता जा रहा है।

ग्रामीणों का कहना है कि यदि बिजली आपूर्ति बाधित होती है तो कम से कम विभाग की ओर से सूचना दी जानी चाहिए कि फाल्ट कहां है, सुधार कार्य में कितना समय लगेगा और बिजली कब तक बहाल होगी। लेकिन वर्तमान व्यवस्था में उपभोक्ताओं को पूरी तरह अंधेरे में रखा जाता है। न तो सूचना मिलती है और न ही शिकायत का संतोषजनक समाधान।

स्थानीय लोगों का कहना है कि बिजली विभाग नियमित रूप से बिजली बिल वसूलने में कोई ढिलाई नहीं करता। समय पर बिल जमा नहीं करने पर उपभोक्ताओं को नोटिस और कनेक्शन काटने की कार्रवाई तक की जाती है। लेकिन जब उपभोक्ताओं को गुणवत्तापूर्ण बिजली उपलब्ध कराने की बात आती है तो विभाग अपनी जिम्मेदारी से पीछे हटता नजर आता है।

ग्रामीणों ने सवाल उठाया है कि यदि गर्मी के मौसम में महीनों तक मेंटेनेंस किया गया था तो फिर बरसात में इतनी अधिक तकनीकी खराबियां क्यों सामने आ रही हैं? आखिर किन कार्यों पर खर्च किया गया? यदि पेड़ों की छंटाई और लाइन सुधार का काम सही तरीके से हुआ होता तो मामूली हवा और हल्की बारिश में बिजली बार-बार बाधित नहीं होती।

ढालम, भुवनेश्वरपुर, डोंगरीपाली, रामभाठा, चनाट, रंगमटिया, दलदली, लीमदरहा सहित आसपास के गांवों के लोगों ने बिजली विभाग से तत्काल व्यवस्था सुधारने की मांग की है। ग्रामीण चाहते हैं कि जर्जर लाइनों और उपकरणों की जांच कर आवश्यक सुधार किए जाएं, फाल्ट का स्थायी समाधान निकाला जाए, शिकायतों के लिए अधिकारी फोन उठाएं तथा बिजली बंद होने की स्थिति में समय पर सूचना उपलब्ध कराई जाए।

ग्रामीणों ने चेतावनी दी है कि यदि बिजली व्यवस्था में शीघ्र सुधार नहीं हुआ और अघोषित कटौती का सिलसिला जारी रहा तो वे सामूहिक रूप से बिजली विभाग के खिलाफ आंदोलन करने के लिए मजबूर होंगे। उनका कहना है कि अब केवल आश्वासन नहीं, बल्कि धरातल पर बेहतर व्यवस्था चाहिए।

क्षेत्रवासियों का कहना है कि बिजली आज केवल सुविधा नहीं बल्कि शिक्षा, स्वास्थ्य, व्यापार, संचार और दैनिक जीवन की मूल आवश्यकता बन चुकी है। ऐसे में बार-बार की अघोषित बिजली कटौती और अधिकारियों की उदासीनता आम जनता के साथ अन्याय है। अब समय आ गया है कि संबंधित अधिकारी लीमदरहा सबस्टेशन क्षेत्र की वास्तविक स्थिति का गंभीरता से निरीक्षण करें और स्थायी समाधान सुनिश्चित करें, ताकि हजारों उपभोक्ताओं को राहत मिल सके।

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