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QDENGA Vaccine: भारत में लॉन्च हुई पहली डेंगू वैक्सीन, जानें किस उम्र के लोगों को लगेगी और कितनी डोज जरूरी


QDENGA Vaccine: भारत में डेंगू से बचाव के लिए पहली बार किसी वैक्सीन को मंजूरी मिली है। जापान की दवा कंपनी टाकेदा फार्मास्युटिकल्स की डेंगू वैक्सीन QDENGA को भारत के दवा नियामक ने मंजूरी दे दी है। यह मंजूरी ऐसे समय में मिली है, जब भारत में पिछले दो दशक में डेंगू के मामलों में 11 गुना बढ़ोतरी हुई है। कंपनी का कहना है कि दुनिया में डेंगू के कुल बोझ का लगभग एक-तिहाई हिस्सा भारत में है।
डेंगू एक वायरल बीमारी है, जो संक्रमित एडीज मच्छर के काटने से फैलती है। डेंगू का खतरा गर्म मौसम वाले देशों में ज्यादा रहता है। अधिकांश लोगों में इसके लक्षण नहीं दिखाई देते या हल्के होते हैं, लेकिन कुछ मामलों में यह गंभीर रूप लेकर जानलेवा भी हो सकती है। डेंगू का कोई विशेष इलाज नहीं है, इसलिए समय पर पहचान और सही इलाज बहुत जरूरी होता है। डेंगू वायरस के चार प्रकार होते हैं और एक बार संक्रमण होने के बाद भी व्यक्ति दोबारा किसी दूसरे प्रकार से संक्रमित हो सकता है।
डेंगू के लक्षण आमतौर पर संक्रमण के 4 से 10 दिन बाद दिखाई देते हैं और 2 से 7 दिन तक रह सकते हैं। इनमें तेज बुखार, तेज सिरदर्द, आंखों के पीछे दर्द, मांसपेशियों और जोड़ों में दर्द, मतली, उल्टी, शरीर पर चकत्ते और सूजी हुई ग्रंथियां शामिल हैं। दूसरी बार संक्रमण होने पर गंभीर डेंगू का खतरा बढ़ जाता है। ऐसे मामलों में तेज पेट दर्द, लगातार उल्टी, तेजी से सांस चलना, मसूड़ों या नाक से खून आना, उल्टी या मल में खून, अत्यधिक प्यास, ठंडी और पीली त्वचा व कमजोरी जैसे लक्षण दिखाई दे सकते हैं। ऐसे लक्षण होने पर तुरंत अस्पताल जाना चाहिए।
विश्व स्वास्थ्य संगठन के अनुसार, भारत डेंगू से सबसे अधिक प्रभावित देशों में शामिल है। देश में लगभग 75 से 80 प्रतिशत संक्रमण ऐसे होते हैं, जिनमें कोई लक्षण नहीं दिखाई देते, लेकिन संक्रमित व्यक्ति फिर भी एडीज मच्छर के जरिए दूसरों तक वायरस पहुंचा सकता है। जिन 20 से 25 प्रतिशत लोगों में लक्षण दिखाई देते हैं, उनमें बच्चों के अस्पताल में भर्ती होने और मौत का खतरा अधिक रहता है। वहीं वयस्कों में डेंगू गंभीर होकर डेंगू हेमरेजिक फीवर और डेंगू शॉक सिंड्रोम जैसी स्थिति पैदा कर सकता है।
यूरोपियन मेडिसिन्स एजेंसी (EMA) के अनुसार, QDENGA एक डेंगू वैक्सीन है जो वयस्कों, किशोरों और चार साल या उससे अधिक उम्र के बच्चों को दी जा सकती है। इसमें डेंगू वायरस के चारों प्रकारों के कमजोर रूप होते हैं, जो बीमारी नहीं फैलाते, लेकिन शरीर की प्रतिरक्षा प्रणाली को वायरस से लड़ने के लिए तैयार करते हैं।
जब यह वैक्सीन लगाई जाती है, तो शरीर की प्रतिरक्षा प्रणाली इन कमजोर वायरस को पहचानकर उनके खिलाफ एंटीबॉडी बनाती है। बाद में अगर व्यक्ति असली डेंगू वायरस के संपर्क में आता है, तो शरीर पहले से तैयार एंटीबॉडी की मदद से वायरस से तेजी से लड़ने की कोशिश करता है। कंपनी के मुताबिक, यह वैक्सीन डेंगू वायरस के चारों प्रकारों से सुरक्षा देने के लिए बनाई गई है और इसे लगवाने के लिए पहले डेंगू होना जरूरी नहीं है। वैक्सीन लगाने से पहले किसी तरह की जांच भी नहीं करनी पड़ती।
यह वैक्सीन डॉक्टर की सलाह पर दी जाती है। इसे बांह की त्वचा के नीचे इंजेक्शन के रूप में लगाया जाता है। इसका पूरा कोर्स दो डोज का होता है और दोनों डोज के बीच कम से कम तीन महीने का अंतर रखा जाता है। अगर दूसरी डोज किसी कारण से देर से लगती है, तो दोबारा शुरुआत करने की जरूरत नहीं होती। दूसरी डोज उपलब्ध होते ही लगाई जा सकती है।
आठ देशों में किए गए एक बड़े अध्ययन में लगभग 20 हजार बच्चों को शामिल किया गया। अध्ययन में पाया गया कि दूसरी डोज के बाद डेंगू के बुखार के मामलों में करीब 80 प्रतिशत कमी आई। वहीं डेंगू के कारण अस्पताल में भर्ती होने का खतरा 90 प्रतिशत तक कम हो गया।
इस वैक्सीन के बाद इंजेक्शन वाली जगह पर दर्द या लालपन, सिरदर्द, मांसपेशियों में दर्द, कमजोरी और अस्वस्थ महसूस होना जैसे दुष्प्रभाव हो सकते हैं। कुछ लोगों को बुखार भी आ सकता है। ये दुष्प्रभाव आमतौर पर हल्के होते हैं और कुछ दिनों में ठीक हो जाते हैं। दूसरी डोज के बाद ये दुष्प्रभाव पहले की तुलना में कम देखे गए।
टाकेदा के अनुसार, 2022 में पहली बार इंडोनेशिया में मंजूरी मिलने के बाद QDENGA को कई देशों में स्वीकृति मिल चुकी है। कंपनी के मुताबिक 43 देशों में इसे मंजूरी मिल चुकी है और दुनिया भर में 3.2 करोड़ से अधिक डोज वितरित की जा चुकी हैं। भारत में उत्पादन बढ़ाने के लिए कंपनी ने 2024 में बायोलॉजिकल ई के साथ साझेदारी भी की है। इस साझेदारी के तहत हर साल 5 करोड़ डोज बनाने की क्षमता विकसित करने की योजना है।
डब्ल्यूएचओ उच्च डेंगू संक्रमण वाले क्षेत्रों में 6 से 16 वर्ष के बच्चों के लिए इस वैक्सीन की सिफारिश करता है। संस्थान का कहना है कि कम संक्रमण वाले इलाकों में फिलहाल इसे नियमित टीकाकरण कार्यक्रम में शामिल करने की सलाह नहीं दी गई है। गंभीर बीमारियों से पीड़ित 6 से 60 वर्ष तक के लोगों को भी, अगर उनके देश में गंभीर डेंगू का खतरा अधिक है, तो वैक्सीन देने पर विचार किया जा सकता है।
डब्ल्यूएचओ यह भी स्पष्ट करता है कि यह वैक्सीन डेंगू के सभी मामलों को नहीं रोक सकती। इसलिए मच्छरों पर नियंत्रण, समय पर इलाज, जागरुकता और सामुदायिक भागीदारी डेंगू से बचाव के लिए उतने ही जरूरी हैं।
डब्ल्यूएचओ के अनुसार, दुनिया की लगभग आधी आबादी डेंगू के खतरे वाले क्षेत्रों में रहती है। हर साल अनुमानित 10 से 40 करोड़ संक्रमण होते हैं। वर्ष 2024 में डेंगू के 1.46 करोड़ से अधिक मामले और 12 हजार से ज्यादा मौतें दर्ज की गईं। भारत, इंडोनेशिया, म्यांमार, श्रीलंका और थाईलैंड दुनिया के सबसे अधिक डेंगू प्रभावित देशों में शामिल हैं।