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नामांकन रद्द होने के बाद कांग्रेस का विरोध प्रदर्शन, जबलपुर में जुटी भीड़ पर उठे सवाल

Congress protests after nomination cancellation; questions raised over the crowd gathered in Jabalpur.

मध्य प्रदेश : मीनाक्षी नटराजन का नामांकन रद्द होने के बाद कांग्रेस लगातार विरोध प्रदर्शन कर रही है। जबलपुर में गुरुवार को किए गए प्रदर्शन को पार्टी ने बड़ा कार्यक्रम बताया था, लेकिन मौके पर जुटी भीड़ ने राजनीतिक चर्चा को नया मोड़ दे दिया।

जबलपुर का प्रदर्शन बना चर्चा का विषय, कम संख्या में पहुंचे कार्यकर्ता
घंटाघर चौराहे पर हुए इस प्रदर्शन में कांग्रेस के केवल 15 कार्यकर्ता ही पहुंचे, जिनमें 6 पुरुष और 9 महिला कार्यकर्ता शामिल थे। कम उपस्थिति के कारण यह विरोध प्रदर्शन राजनीतिक हलकों में सवालों के घेरे में आ गया।

बीजेपी सरकार के खिलाफ नारेबाजी और पुतला दहन
प्रदर्शन के दौरान कार्यकर्ताओं ने बीजेपी सरकार के खिलाफ जमकर नारेबाजी की और पुतला दहन भी किया। हालांकि राजनीतिक जानकारों के अनुसार, यह प्रदर्शन अपेक्षित प्रभाव नहीं छोड़ सका।

कांग्रेस नेताओं का आरोप, अन्याय का मुद्दा उठाया
महिला कांग्रेस की राष्ट्रीय सचिव सुमिता मिश्रा ने कहा कि मीनाक्षी नटराजन के साथ अन्याय हुआ है और इसी के विरोध में यह प्रदर्शन किया गया। उन्होंने इसे सीधे तौर पर मुख्यमंत्री डॉ मोहन यादव के खिलाफ विरोध बताया।

भोपाल में बड़ा प्रदर्शन, दिग्विजय सिंह भी हुए शामिल
इसी मुद्दे पर राजधानी भोपाल में भी कांग्रेस ने विरोध जताया। यहां पूर्व मुख्यमंत्री दिग्विजय सिंह और मीनाक्षी नटराजन स्वयं भी प्रदर्शन में शामिल हुईं। इस दौरान कार्यकर्ताओं ने चरखा चलाकर सूत काता और गांधीवादी तरीके से सत्याग्रह किया।

राज्यसभा सीटों पर सियासी समीकरण और बढ़ा तनाव
मध्य प्रदेश में राज्यसभा की तीन सीटों पर बीजेपी प्रत्याशियों का निर्विरोध चयन हुआ है। जहां दो सीटों पर बीजेपी की जीत पहले से तय मानी जा रही थी, वहीं तीसरी सीट पर भी कांग्रेस की उम्मीदों को झटका लगा।

नामांकन रद्द होने की वजह और राजनीतिक असर
आरोप है कि मीनाक्षी नटराजन का नामांकन जानकारी छिपाने के कारण रद्द किया गया। इसके बाद पूरे राज्यसभा चुनाव में बीजेपी उम्मीदवारों का निर्विरोध चयन हो गया, जिससे राजनीतिक तापमान और बढ़ गया है।

कांग्रेस की रणनीति पर सवाल, आगे की राह चुनौतीपूर्ण
लगातार हो रहे विरोध प्रदर्शनों के बीच कांग्रेस के सामने संगठनात्मक मजबूती और जन समर्थन जुटाने की चुनौती भी बढ़ती दिख रही है। आने वाले दिनों में इस मुद्दे पर सियासी टकराव और तेज होने की संभावना है।

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