Big breakingTreandingछत्तीसगढ़

हत्या के आरोपी को सुप्रीम कोर्ट से भी नहीं मिली राहत, जमानत याचिका खारिज…हाई कोर्ट के फैसले पर लगी मुहर

Murder accused denied relief by Supreme Court; bail plea dismissed... High Court's verdict upheld.

 बिलासपुर। हत्या के एक गंभीर मामले में आरोपी विमल कुमार सप्रे को सुप्रीम कोर्ट से भी राहत नहीं मिली है। देश की सर्वोच्च अदालत ने विशेष अनुमति याचिका (एसएलपी) पर सुनवाई के बाद जमानत देने से इनकार करते हुए याचिका खारिज कर दी। इसके साथ ही छत्तीसगढ़ हाई कोर्ट के उस फैसले पर भी मुहर लग गई, जिसमें आरोपी की जमानत याचिका पहले ही खारिज कर दी गई थी।

सुप्रीम कोर्ट ने कहा- हस्तक्षेप की जरूरत नहीं

जस्टिस दीपांकर दत्ता और जस्टिस सतीश चंद्र शर्मा की डिवीजन बेंच ने मामले की सुनवाई के दौरान कहा कि हाई कोर्ट के आदेश में हस्तक्षेप करने का कोई आधार नहीं बनता। इसी टिप्पणी के साथ विशेष अनुमति याचिका को खारिज कर दिया गया।

खेत में फसल कटाई विवाद से शुरू हुआ था मामला

मामला मुंगेली जिले के नेवासपुर क्षेत्र का है। शिकायतकर्ता प्रफुल्ला सोनकर के अनुसार 11 दिसंबर 2025 को उन्हें सूचना मिली थी कि उनके खेत में कुछ लोग जबरन फसल काट रहे हैं। इसके बाद वह अपने परिवार के सदस्यों के साथ मौके पर पहुंचे और विरोध किया।

आरोप है कि इसी दौरान विमल कुमार सप्रे समेत अन्य आरोपियों ने लाठी और धारदार हथियारों से हमला कर दिया। इस हमले में शिकायतकर्ता, उनके माता-पिता और दादा गंभीर रूप से घायल हो गए। इलाज के दौरान जनकराम सोनकर की मौत हो गई थी।

बचाव पक्ष ने दी थी लंबी कैद और समानता का तर्क

आरोपी की ओर से कोर्ट में कहा गया कि उसके खिलाफ केवल लाठी से हमला करने का आरोप है, जबकि मृतक को लगी गंभीर चोटें किसी अन्य हथियार से हुई थीं। बचाव पक्ष ने यह भी तर्क दिया कि मामले के कुछ अन्य आरोपियों को पहले ही जमानत मिल चुकी है और आरोपी का कोई आपराधिक रिकॉर्ड भी नहीं है।

साथ ही यह भी बताया गया कि आरोपी 25 दिसंबर 2025 से जेल में बंद है और मुकदमे की सुनवाई अभी शुरू नहीं हुई है।

राज्य सरकार ने किया कड़ा विरोध

राज्य सरकार की ओर से पेश अधिवक्ता ने जमानत का विरोध करते हुए कहा कि आरोपी का नाम एफआईआर और गवाहों के बयानों में स्पष्ट रूप से दर्ज है। जांच के दौरान उससे लाठी भी बरामद हुई थी और अपराध में उसकी सक्रिय भूमिका सामने आई है।

सरकार ने यह भी कहा कि जिन आरोपियों को जमानत मिली है, उनकी परिस्थितियां और भूमिका अलग थी, इसलिए वर्तमान आरोपी को समान आधार पर राहत नहीं दी जा सकती।

हाई कोर्ट ने अपराध की गंभीरता को माना था आधार

इससे पहले मामले की सुनवाई जस्टिस संजय कुमार जायसवाल की एकलपीठ में हुई थी। कोर्ट ने अपराध की गंभीरता, आरोपों की प्रकृति और आरोपी की कथित भूमिका को देखते हुए जमानत देने से इनकार कर दिया था।अदालत ने अपने आदेश में कहा था कि उपलब्ध तथ्यों और परिस्थितियों को देखते हुए आरोपी को जमानत पर रिहा करना उचित नहीं होगा।

कई गंभीर धाराओं में दर्ज है मामला

मुंगेली के सिटी कोतवाली थाने में विमल कुमार सप्रे और अन्य आरोपियों के खिलाफ भारतीय न्याय संहिता (बीएनएस) की विभिन्न गंभीर धाराओं के तहत मामला दर्ज किया गया है। इस प्रकरण में कुल आठ आरोपी हैं, जिनमें सात वयस्क और एक नाबालिग शामिल है।सुप्रीम कोर्ट द्वारा जमानत याचिका खारिज किए जाने के बाद अब आरोपी को ट्रायल पूरा होने तक जेल में ही रहना पड़ सकता है।

Back to top button
ताज़ा खबरें