Big breakingTreandingछत्तीसगढ़

रायपुर में मिट्टी उत्खनन पर बड़ा विवाद: स्थगन आदेश के बाद भी जारी गतिविधियों ने उठाए गंभीर सवाल

Major controversy over soil excavation in Raipur: Activities continuing despite a stay order raise serious questions.

Raipur :  कोलियारी इलाके में चल रहे मिट्टी उत्खनन को लेकर हालात लगातार गरमाते जा रहे हैं। आरोप है कि राजस्व विभाग द्वारा स्पष्ट स्थगन आदेश जारी किए जाने के बावजूद भी तालाब क्षेत्र में मशीनों और हाइवा वाहनों के जरिए मिट्टी निकालने और परिवहन का काम नहीं रुका।इस पूरे मामले ने स्थानीय प्रशासनिक व्यवस्था और नियमों के पालन पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं।

स्थगन आदेश के बावजूद गतिविधियां जारी रहने से बढ़ा तनाव
स्थानीय लोगों का कहना है कि जब किसी क्षेत्र में प्रशासनिक रोक लागू हो जाती है, तो वहां किसी भी प्रकार की खुदाई या परिवहन पूरी तरह बंद होना चाहिए। इसके बावजूद मौके पर लगातार मशीनों की आवाजाही देखी गई, जिससे ग्रामीणों में नाराजगी बढ़ गई है।Shitala Talab क्षेत्र से जुड़े इस विवाद ने अब केवल स्थानीय मुद्दा नहीं बल्कि एक व्यापक प्रशासनिक बहस का रूप ले लिया है।

निरीक्षण के बाद भी कार्रवाई नहीं, उठे गंभीर सवाल
जानकारी के अनुसार खनिज विभाग की टीम निरीक्षक प्रवीण नेताम के नेतृत्व में मौके पर पहुंची थी। वहां एक चैन माउंटेन मशीन और कई हाइवा वाहन मौजूद पाए गए। इसके बावजूद किसी वाहन की जब्ती या मशीन पर कोई कार्रवाई नहीं की गई।टीम कुछ समय निरीक्षण करने के बाद लौट गई, जिसके बाद ग्रामीणों की नाराजगी और अधिक बढ़ गई।

ग्रामीणों के सवालों ने बढ़ाई प्रशासनिक चुनौती
स्थानीय लोगों ने कई अहम सवाल उठाए हैं
क्या मौके पर मौजूद वाहनों के दस्तावेजों की जांच हुई
क्या रॉयल्टी और अनुमति संबंधी कागजात वैध पाए गए
और यदि सब कुछ नियमों के अनुरूप था तो सार्वजनिक जानकारी क्यों नहीं दी गई इन सवालों ने मामले को और अधिक जटिल बना दिया है।

ग्रामीण सहमति के दावे पर कानूनी बहस तेज
मीडिया बातचीत में खनिज निरीक्षक की ओर से यह कहा गया कि कार्य ग्रामीणों की सहमति से चल रहा था और संबंधित पक्षों को फिलहाल काम रोकने की समझाइश दी गई है।इस बयान के बाद विवाद और गहरा गया है। कानूनी विशेषज्ञों और स्थानीय लोगों का मानना है कि केवल मौखिक सहमति के आधार पर खनन या मिट्टी परिवहन की अनुमति नहीं दी जा सकती। इसके लिए स्पष्ट सरकारी अनुमति और दस्तावेज जरूरी होते हैं।

निष्पक्षता और कार्रवाई को लेकर उठ रहे सवाल
स्थानीय नागरिकों का कहना है कि सामान्य मामलों में विभाग तुरंत जब्ती और कार्रवाई करता है, लेकिन इस मामले में स्थिति अलग दिखाई दे रही है। यही कारण है कि विभाग की कार्यप्रणाली और निष्पक्षता पर सवाल उठ रहे हैं।ग्रामीणों का मानना है कि नियम सभी के लिए समान होने चाहिए और किसी भी प्रकार की लापरवाही की स्थिति में जांच जरूरी है।

जांच और पारदर्शिता की मांग तेज
पूरा मामला अब प्रशासनिक जवाबदेही से जुड़ा बड़ा विषय बन गया है। ग्रामीणों और सामाजिक संगठनों की मांग है कि जिला प्रशासन, राजस्व विभाग और खनिज विभाग मिलकर इस पूरे मामले की निष्पक्ष जांच करें।लोगों का कहना है कि यदि नियमों का उल्लंघन हुआ है तो जिम्मेदारों पर कार्रवाई हो, और यदि सब कुछ वैध था तो स्थिति को सार्वजनिक रूप से स्पष्ट किया जाए।फिलहाल सबसे बड़ा सवाल यही बना हुआ है कि स्थगन आदेश के बावजूद काम कैसे चलता रहा और निरीक्षण के बाद भी कार्रवाई क्यों नहीं हुई।

Back to top button
ताज़ा खबरें