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Bilaspur Dowry Case: दहेज प्रताड़ना मामले में हाईकोर्ट की अहम पहल, पति को 1 लाख रुपये जमा करने की शर्त पर मिली राहत

Bilaspur Dowry Case: High Court Takes Significant Initiative in Dowry Harassment Case; Husband Granted Relief on Condition of Depositing ₹1 Lakh

 बिलासपुर : जुड़े दहेज प्रताड़ना और घरेलू उत्पीड़न के एक मामले में छत्तीसगढ़ हाईकोर्ट ने महत्वपूर्ण अंतरिम आदेश जारी किया है। अदालत ने पति, सास और ससुर को फिलहाल राहत देते हुए मामले को कानूनी लड़ाई के बजाय आपसी सहमति और मध्यस्थता के माध्यम से सुलझाने पर जोर दिया है।

1 लाख रुपये जमा करने पर ही मिलेगी गिरफ्तारी से राहत

हाईकोर्ट ने आरोपी पति अंकुर गौराहा को निर्देश दिया है कि वह दो सप्ताह के भीतर हाईकोर्ट के मीडिएशन सेंटर में एक लाख रुपये जमा करें। अदालत ने स्पष्ट किया कि यह राशि निर्धारित समय सीमा के भीतर जमा होने पर ही 29 जून 2026 तक गिरफ्तारी से संरक्षण प्रभावी रहेगा।यदि तय अवधि में राशि जमा नहीं की जाती है, तो अंतरिम राहत स्वतः समाप्त मानी जाएगी।

दहेज प्रताड़ना का मामला दर्ज होने के बाद पहुंचे हाईकोर्ट

मामला बिलासपुर के राजकिशोर नगर निवासी अंकुर गौराहा, उनके पिता राकेश गौराहा और माता रेखा गौराहा से जुड़ा है। तीनों के खिलाफ अंकुर की पत्नी भाव्या गौराहा ने सारंगढ़ थाने में दहेज प्रताड़ना और उत्पीड़न की शिकायत दर्ज कराई थी।

एफआईआर दर्ज होने के बाद आरोपियों ने हाईकोर्ट में याचिका दायर कर कार्रवाई पर रोक लगाने और एफआईआर निरस्त करने की मांग की थी।

अदालत में क्या दलील दी गई?

याचिकाकर्ताओं की ओर से कहा गया कि शिकायत में लगाए गए आरोप निराधार हैं और दुर्भावनावश मामला दर्ज कराया गया है। उनका तर्क था कि एफआईआर काफी समय बाद दर्ज की गई तथा उसमें दहेज मांगने या क्रूरता से संबंधित ठोस तथ्यों का अभाव है।

मध्यस्थता से समाधान निकालने पर कोर्ट का जोर

सुनवाई के दौरान हाईकोर्ट ने माना कि यह मामला वैवाहिक और पारिवारिक विवाद से जुड़ा है। ऐसे मामलों में यदि संभव हो तो समझौते और संवाद के जरिए समाधान तलाशना बेहतर विकल्प हो सकता है।

इसी दृष्टिकोण के तहत अदालत ने पति-पत्नी दोनों को 8 जून 2026 को हाईकोर्ट के मीडिएशन सेंटर में उपस्थित होने का निर्देश दिया है।

पुलिस अधीक्षक को देनी होगी राशि जमा करने की जानकारी

कोर्ट ने आदेश में कहा है कि एक लाख रुपये जमा करने के बाद उसकी रसीद संबंधित जिले के पुलिस अधीक्षक के समक्ष प्रस्तुत करनी होगी। यह प्रक्रिया अंतरिम राहत की शर्तों का हिस्सा होगी।

समझौता होने पर राशि का होगा उपयोग

अदालत ने यह भी स्पष्ट किया है कि यदि भविष्य में दोनों पक्षों के बीच आपसी सहमति से अंतिम समझौता हो जाता है, तो जमा की गई एक लाख रुपये की राशि को उस समझौते का हिस्सा माना जा सकेगा।

29 जून तक अगली सुनवाई पर नजर

अब इस मामले में सभी की नजर 8 जून को होने वाली मध्यस्थता प्रक्रिया और 29 जून तक की आगामी न्यायिक कार्यवाही पर रहेगी। यदि दोनों पक्षों के बीच सहमति बनती है तो विवाद के समाधान का रास्ता निकल सकता है, अन्यथा मामला आगे कानूनी प्रक्रिया के तहत चलेगा।

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