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मां ने गहने बेचकर खरीदी क्रिकेट किट, अब भारत के लिए खेलकर सपना पूरा कर रहीं क्रांति गौड़

Mother sold jewelry to buy a cricket kit; now Kranti Gaur is fulfilling her dream by playing for India.

Kranti Goud की सफलता सिर्फ मैदान पर किए गए शानदार प्रदर्शन की कहानी नहीं है, बल्कि संघर्ष, परिवार के विश्वास और मां के त्याग की भी मिसाल है। भारतीय महिला तेज गेंदबाज ने अपने शुरुआती दिनों को याद करते हुए बताया कि उनकी मां ने क्रिकेट का सपना पूरा करने के लिए अपने गहने तक बेच दिए थे। यही त्याग उनके लिए आगे बढ़ने की सबसे बड़ी प्रेरणा बना।

छोटे गांव से निकलकर भारतीय टीम तक का सफर

मध्य प्रदेश के एक छोटे से गांव से आने वाली क्रांति ने कहा कि उन्होंने कभी नहीं सोचा था कि एक दिन भारत का प्रतिनिधित्व करेंगी। उन्होंने बताया कि उनके गांव में लड़कियों के लिए घर से बाहर निकलना भी आसान नहीं था और समाज की आलोचनाओं का सामना करना पड़ता था।

उन्होंने कहा कि उन्होंने लोगों की बातों पर ध्यान देने के बजाय लगातार मेहनत करना चुना। नियमित अभ्यास, धैर्य और आत्मविश्वास ने उन्हें भारतीय टीम तक पहुंचाया।

मां के त्याग ने बढ़ाया हौसला

क्रांति ने बताया कि आर्थिक परेशानियां उनके क्रिकेट करियर की सबसे बड़ी चुनौती थीं। कई बार मैच खेलने के लिए भी पैसों की कमी होती थी। ऐसे समय में उनकी मां ने अच्छी क्रिकेट किट खरीदने के लिए अपने गहने बेच दिए।

उन्होंने कहा कि यह त्याग उनके जीवन का सबसे भावुक पल था और उसी दिन उन्होंने तय कर लिया था कि अपने माता-पिता के विश्वास और बलिदान को कभी व्यर्थ नहीं जाने देंगी।

परिवार के भरोसे ने बदली जिंदगी

क्रांति का कहना है कि अगर परिवार साथ खड़ा हो, तो समाज की आलोचनाएं ज्यादा मायने नहीं रखतीं।

उन्होंने बताया कि उनके माता-पिता ने कभी उन्हें यह महसूस नहीं होने दिया कि वह कुछ गलत कर रही हैं। परिवार के भरोसे ने उन्हें हर मुश्किल से लड़ने और अपने सपनों का पीछा करने की ताकत दी।

भारतीय टीम में शानदार शुरुआत

क्रांति गौड़ ने श्रीलंका में आयोजित त्रिकोणीय श्रृंखला के दौरान दक्षिण अफ्रीका के खिलाफ अपना एकदिवसीय अंतरराष्ट्रीय पदार्पण किया। इसके बाद इंग्लैंड दौरे पर उन्होंने टी20 अंतरराष्ट्रीय क्रिकेट में भी डेब्यू किया और अपनी प्रभावशाली गेंदबाजी से 6 विकेट लेकर सभी का ध्यान अपनी ओर खींचा।

गांव की बेटियों के लिए बनीं प्रेरणा

क्रांति ने बताया कि उनके प्रदर्शन और महिला क्रिकेट में भारत की सफलता के बाद उनके गांव घुवारा में क्रिकेट अकादमी की शुरुआत हुई है। अब बड़ी संख्या में लड़कियां वहां क्रिकेट सीखने पहुंच रही हैं।

उन्होंने कहा कि पहले जिन परिवारों में बेटियों को बाहर निकलने की अनुमति नहीं मिलती थी, आज वही माता-पिता उन्हें क्रिकेट खेलने के लिए प्रोत्साहित कर रहे हैं। यह बदलाव उनके लिए सबसे बड़ी उपलब्धियों में से एक है।

नई पीढ़ी के लिए दिया प्रेरणादायक संदेश

क्रांति का मानना है कि मेहनत और परिवार का साथ किसी भी मुश्किल को आसान बना सकता है। उन्होंने कहा कि वह चाहती हैं कि गांव की बेटियां अपने सपनों को सीमित न करें, बल्कि पूरी लगन के साथ उन्हें हासिल करने के लिए मेहनत करें। उनके अनुसार, हर संघर्ष एक दिन सफलता की नई कहानी लिख सकता है।

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