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बारिश से पहले बेदखली नोटिस पर हाई कोर्ट की रोक, सरपंच और राज्य सरकार को जारी हुआ नोटिस

High Court stays eviction notice ahead of rains; notice issued to Sarpanch and State Government.

बिलासपुर। छत्तीसगढ़ के बेमेतरा जिले की ग्राम पंचायत नांदघाट में कथित अतिक्रमण हटाने को लेकर जारी बेदखली नोटिस पर छत्तीसगढ़ हाई कोर्ट ने अंतरिम रोक लगा दी है। पंचायत के सरपंच ने ग्रामसभा के प्रस्ताव का हवाला देते हुए दो दर्जन से अधिक लोगों को सात दिन के भीतर कब्जा हटाने का नोटिस जारी किया था। मामले की सुनवाई के बाद हाई कोर्ट ने अगली सुनवाई तक किसी भी प्रकार की दंडात्मक कार्रवाई पर रोक लगाते हुए सरपंच और राज्य सरकार से जवाब मांगा है।

दो दर्जन से अधिक लोगों को मिला था बेदखली नोटिस

जानकारी के अनुसार, ग्राम पंचायत नांदघाट के सरपंच ने ग्रामसभा की बैठक में पारित प्रस्ताव के आधार पर खेमचंद साहू, कृष्णा ठाकुर सहित दो दर्जन से अधिक लोगों को नोटिस जारी किया था। नोटिस में सात दिनों के भीतर कथित अतिक्रमण हटाने का निर्देश दिया गया था और चेतावनी दी गई थी कि निर्धारित समय के बाद पंचायत स्वयं बेदखली की कार्रवाई करेगी।

हाई कोर्ट में दी गई चुनौती

सरपंच के आदेश को चुनौती देते हुए खेमचंद साहू और अन्य प्रभावित लोगों ने अधिवक्ता शैलेंद्र कुमार वाजपेयी के माध्यम से छत्तीसगढ़ हाई कोर्ट में याचिका दायर की। याचिका में कहा गया कि जिस भूमि पर उनका कब्जा है, उसे राजस्व अधिकारियों द्वारा पहले ही ‘आबादी भूमि’ घोषित किया जा चुका है। साथ ही यह भी दलील दी गई कि बारिश के मौसम में बेदखली की कार्रवाई से प्रभावित परिवारों को गंभीर परेशानी का सामना करना पड़ेगा।

आबादी भूमि होने पर कोर्ट ने दिया अंतरिम संरक्षण

मामले की सुनवाई जस्टिस ए.के. प्रसाद की एकलपीठ में हुई। याचिकाकर्ताओं की ओर से पेश अधिवक्ता ने अदालत को बताया कि संबंधित एसडीएम (राजस्व) और कलेक्टर के आदेशों में विवादित भूमि को आबादी भूमि घोषित किया गया है।

तथ्यों पर विचार करने के बाद हाई कोर्ट ने अंतरिम राहत देते हुए निर्देश दिया कि अगली सुनवाई तक याचिकाकर्ताओं के खिलाफ कोई भी दंडात्मक कार्रवाई नहीं की जाएगी। साथ ही ग्राम पंचायत नांदघाट के सरपंच और राज्य शासन को नोटिस जारी कर जवाब दाखिल करने के निर्देश दिए गए हैं।

राज्य सरकार ने मांगा जवाब दाखिल करने का समय

राज्य सरकार की ओर से पैनल अधिवक्ता श्रेयांश मेहता ने अदालत से जवाब और संबंधित दस्तावेज प्रस्तुत करने के लिए दो सप्ताह का समय मांगा। कोर्ट ने यह अनुरोध स्वीकार करते हुए राज्य सरकार को दो सप्ताह की मोहलत दी है। मामले की अगली सुनवाई चार सप्ताह बाद निर्धारित की गई है।

नोटिस में क्या कहा गया था

ग्राम पंचायत की ओर से जारी नोटिस में आरोप लगाया गया था कि संबंधित लोगों ने शासकीय भूमि, गौरी-गौरा तालाब, मरघट, सड़क, गौठान, तालाब और शासकीय भवन परिसर की भूमि पर अवैध कब्जा कर मकान बना लिया है। नोटिस में 5 जून 2026 को हुई ग्रामसभा के प्रस्ताव का हवाला देते हुए सात दिन के भीतर कब्जा खाली करने के निर्देश दिए गए थे। साथ ही चेतावनी दी गई थी कि समय सीमा के बाद पंचायत स्वयं अतिक्रमण हटाने की कार्रवाई करेगी, जिसकी जिम्मेदारी संबंधित लोगों की होगी।

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