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मुंह के छाले कब बन सकते हैं खतरे का संकेत, समय रहते पहचानना क्यों है जरूरी
When can mouth ulcers signal a danger? Why is it important to recognize the signs in time?


हममें से ज्यादातर लोगों को कभी न कभी मुंह में छाले की समस्या जरूर होती है। यह आमतौर पर तीखा खाना खाने, गलती से जीभ या होंठ कट जाने या शरीर में विटामिन की कमी के कारण हो सकता है। अधिकतर मामलों में ये छाले कुछ दिनों या एक हफ्ते के भीतर अपने आप ठीक हो जाते हैं। लेकिन विशेषज्ञों का कहना है कि हर छाले को सामान्य समझकर नजरअंदाज करना सही नहीं है।
दो हफ्ते से ज्यादा बना छाला हो सकता है चेतावनी संकेत
कैंसर विशेषज्ञों के अनुसार अगर मुंह का कोई छाला दो हफ्ते से ज्यादा समय तक ठीक नहीं होता, तो यह सिर्फ सामान्य घाव नहीं बल्कि किसी गंभीर समस्या का संकेत भी हो सकता है। ऐसे मामलों में तुरंत डॉक्टर से जांच कराना बेहद जरूरी हो जाता है।
भारत में ओरल कैंसर का बढ़ता खतरा, स्टडी में चौंकाने वाला खुलासा
नेशनल एकेडमी ऑफ मेडिकल साइंसेज की रिपोर्ट के अनुसार भारत में ओरल कैंसर के मामले दुनिया में सबसे अधिक हैं। यह वैश्विक मामलों का लगभग एक तिहाई हिस्सा है। विशेषज्ञों का कहना है कि पुरुषों में यह कैंसर सबसे आम कैंसरों में से एक बन चुका है, इसलिए शुरुआती लक्षणों को नजरअंदाज करना जोखिम बढ़ा सकता है।
मुंह के छाले क्यों होते हैं और कब हो जाएं सतर्क
मुंह के छाले अक्सर तनाव, खराब ओरल हाइजीन, अपच या पोषण की कमी से होते हैं। सामान्य स्थिति में ये कुछ दिनों में ठीक हो जाते हैं। लेकिन अगर छाला लंबे समय तक बना रहे, दर्द कम न हो या जलन लगातार बनी रहे, तो यह खतरे का संकेत हो सकता है।
विशेषकर तंबाकू, गुटखा या पान का सेवन करने वाले लोगों को इस स्थिति में ज्यादा सतर्क रहने की जरूरत होती है, क्योंकि ऐसे मामलों में प्री कैंसरस घाव का खतरा बढ़ सकता है।
भारत में जोखिम क्यों ज्यादा, आदतें बन रही बड़ी वजह
विशेषज्ञों के अनुसार भारत में पान, गुटखा और तंबाकू चबाने जैसी आदतें ओरल कैंसर के खतरे को बढ़ाती हैं। शराब के साथ इनका सेवन मुंह की अंदरूनी परत को और अधिक नुकसान पहुंचाता है। इसके अलावा खराब दंत स्वच्छता और दांतों की लगातार रगड़ भी जोखिम को बढ़ा सकती है।
इन लक्षणों को नजरअंदाज करना हो सकता है भारी
मुंह के छालों के अलावा कुछ अन्य शुरुआती संकेत भी गंभीर समस्या की ओर इशारा कर सकते हैं जैसे
मुंह से लगातार बदबू आना
मसूड़ों से खून आना या दांतों का ढीला होना
मुंह में सफेद या लाल धब्बे दिखाई देना
मुंह या गर्दन में सूजन और दर्द
बोलने या आवाज में बदलाव
समय पर जांच से बच सकता है बड़ा खतरा
डॉक्टरों के अनुसार अगर मुंह में कोई घाव लंबे समय तक बना रहता है तो तुरंत डेंटिस्ट या विशेषज्ञ से जांच करानी चाहिए। जरूरत पड़ने पर बायोप्सी या सीटी स्कैन जैसी जांच की जाती है ताकि बीमारी की सही स्थिति का पता लगाया जा सके।
जागरूकता और बचाव ही सबसे बड़ा सुरक्षा कवच
विशेषज्ञों का मानना है कि मुंह का कैंसर शुरुआती चरण में पहचान लिया जाए तो इसका पूरी तरह इलाज संभव है। तंबाकू और शराब से दूरी, नियमित दंत जांच और ओरल हाइजीन का ध्यान रखना इस बीमारी से बचाव का सबसे प्रभावी तरीका है।