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सीबीआई जांच से जुड़े मामले में सुप्रीम कोर्ट से रविशंकर महाराज को आंशिक राहत, हाई कोर्ट में जल्द सुनवाई मांगने की मिली अनुमति

Ravishankar Maharaj gets partial relief from the Supreme Court in a case linked to the CBI investigation; granted permission to seek an early hearing in the High Court.

बिलासपुर। सीबीआई जांच से जुड़े एक महत्वपूर्ण मामले में याचिकाकर्ता रविशंकर महाराज को सुप्रीम कोर्ट से सीमित राहत मिली है। सर्वोच्च अदालत ने विशेष अनुमति याचिका का निपटारा करते हुए उन्हें छत्तीसगढ़ हाई कोर्ट में लंबित याचिका की शीघ्र सुनवाई के लिए आवेदन प्रस्तुत करने की अनुमति दे दी है। हालांकि, सुप्रीम कोर्ट ने मामले के मेरिट पर कोई टिप्पणी करने से इनकार किया है।

हाई कोर्ट में जल्द सुनवाई का अनुरोध कर सकेंगे याचिकाकर्ता

सुप्रीम कोर्ट की जस्टिस बी.वी. नागरत्ना और जस्टिस जायमाल्य बागची की खंडपीठ ने गुरुवार को मामले की सुनवाई की। याचिकाकर्ता की ओर से वरिष्ठ अधिवक्ता सिद्धार्थ दवे ने पक्ष रखा। सुनवाई के बाद अदालत ने कहा कि यदि याचिकाकर्ता चाहें तो छत्तीसगढ़ हाई कोर्ट में 14 जुलाई 2026 के लिए निर्धारित सुनवाई की तारीख को पहले करने का अनुरोध कर सकते हैं।सर्वोच्च अदालत ने यह भी स्पष्ट किया कि यदि इस संबंध में आवेदन प्रस्तुत किया जाता है तो हाई कोर्ट मामले के तथ्यों और लागू कानून के आधार पर स्वतंत्र रूप से उस पर निर्णय लेगा।

दूरसंचार संदेशों के इंटरसेप्शन आदेश की वैधता पर विवाद

यह मामला हाई कोर्ट में लंबित उस याचिका से जुड़ा है, जिसमें दूरसंचार संदेशों के वैध इंटरसेप्शन से संबंधित आदेश की वैधता को चुनौती दी गई है। याचिकाकर्ता का तर्क है कि टेलीकम्युनिकेशंस प्रोसीजर्स एंड सेफगार्ड्स फॉर लॉफुल इंटरसेप्शन ऑफ मैसेजेज रूल्स 2024 के नियम 3(3)(बी) के तहत किसी भी इंटरसेप्शन आदेश को सात कार्य दिवस के भीतर समीक्षा समिति के समक्ष अनुमोदन के लिए प्रस्तुत करना अनिवार्य है।याचिका में यह भी कहा गया है कि यदि निर्धारित समय सीमा में ऐसा नहीं किया जाता, तो संबंधित आदेश स्वतः प्रभावहीन हो जाता है और उसके आधार पर एकत्र किए गए साक्ष्यों की वैधानिकता पर प्रश्न खड़े होते हैं।

हाई कोर्ट ने मांगा था संशोधित शपथपत्र

मामले की पिछली सुनवाई के दौरान हाई कोर्ट ने पाया था कि यह कानूनी आधार मूल याचिका में स्पष्ट रूप से शामिल नहीं किया गया था। इसके बाद अदालत ने याचिकाकर्ता को नया शपथपत्र दाखिल कर अपने तर्क स्पष्ट करने का निर्देश दिया था। साथ ही सीबीआई को भी सक्षम अधिकारी के शपथपत्र के साथ जवाब प्रस्तुत करने को कहा गया था।यह मामला पहले 24 जून को सूचीबद्ध था और अब इसकी अगली सुनवाई 14 जुलाई 2026 को निर्धारित है। इसी बीच याचिकाकर्ता ने शीघ्र सुनवाई की मांग को लेकर सुप्रीम कोर्ट में विशेष अनुमति याचिका दायर की थी। सुप्रीम कोर्ट ने केवल हाई कोर्ट में अग्रिम सुनवाई का अनुरोध करने की अनुमति दी है और मामले के कानूनी पहलुओं पर कोई टिप्पणी नहीं की है।

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